सरिस्का टाइगर रिजर्व: कैसे घूमे,सफारी शुल्क और क्या-क्या देखे

 सरिस्का टाइगर रिजर्व: अलवर का प्राकृतिक तोहफा 

sariska tiger reserve alwar


देश में निरंतर बाघों की संख्या में घटोतरी के चलते कई वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया जिनमे से एक सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य एक हैं। राजस्थान जिसकों आमतौर पर रेगिस्तान और सूखे के नजरिये से देखा जाता है, सरिस्का, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और रणथम्भौर अभयारण्य इस नजरिये को बदल देता हैं। सरिस्का टाइगर रिज़र्व एक बाघ संरक्षण राष्ट्रीय उद्यान है जिसमें बाघों की संख्या में वृध्दि हुई हैं। अगर आप सरिस्का टाइगर रिज़र्व घुमनें आने की योजना बना रहे हो तो आप सही जगह आये हो। इस ब्लॉग में हम आपको सरिस्का टाइगर रिज़र्व के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे जिनमे सफारी शुल्क, स्थापना, कैसे घूमे, क्या-क्या देखें आदि शामिल हैं। 


स्थापना - 1958 ईस्वी में (वन्यजीव अभयारण्य )

                1978 ईस्वी में (टाइगर रिज़र्व )

                 1982 ईस्वी में (राष्ट्रिय उद्यान )

क्षेत्रफल - 1204 वर्ग किलोमीटर 

कहाँ स्थित - राजस्थान के अलवर जिले में 

घूमने आने का सही समय - अक्टूबर से फ़रवरी ( गर्मी से बचने के लिए )

                                          मार्च से जून (बाघों की साइटिंग के लिए )

सफारी के तरीके - 6 सीटर जीप 

                             20 सीटर कैंटर

सफारी का समय - सुबह 06:30 AM से 10:00 AM, 

                              शाम 02:30 PM से 6:00 PM  

सफारी शुल्क - ₹1,100-₹1,300 (भारतीय नागरिक )

                         ₹1,700-₹2,100 (विदेशी नागरिक )    

कैसे पहुँचे - बस द्वारा (35-40 किमी अलवर बस स्टैंड )

                    ट्रेन द्वारा (37 किमी अलवर जंक्शन )

आस-पास - सिलीसेढ़ झील, बाला किला, भानगढ़ किला, चाँद बावड़ी 

                    मूसी रानी की छतरी, कंकवारी किला, पांडुपोल हनुमान मंदिर 

                    नीलकंठ महादेव मंदिर 

सरिस्का टाइगर रिज़र्व में हर बुधवार को सफारी बंद रहती हैं। 


सरिस्का टाइगर रिज़र्व की स्थापना

सरिस्का टाइगर रिज़र्व राजस्थान के अलवर जिले में स्थित हैं। इसकी स्थापना 1958 ईस्वी में राजस्थान सरकार द्वारा एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में की। साल 1978 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत सरिस्का को टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया। साल 1982 में सरिस्का को राष्ट्रिय उद्यान घोषित कर दिया गया। बता दे की शुरुआत में सरिस्का अलवर के लिए एक शिकार करने वाले क्षेत्र के रूप में संरक्षित किया गया था। 

सरिस्का टाइगर रिज़र्व कुल 1200 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ हैं। इसमें से 881 वर्ग किलोमीटर बाघ क्षेत्र और बाकी बफर क्षेत्र हैं। 1982 में जिस क्षेत्र को राष्ट्रिय उद्यान घोषित किया उसका क्षेत्रफल लगभग 274 वर्ग किलोमीटर हैं। 

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सरिस्का टाइगर रिज़र्व में क्या-क्या देखें 

जैव विविधता और वनस्पति - अगर आप सरिस्का टाइगर रिज़र्व घुमनें गए हो तो आपको यहाँ पर कई प्रजाति के जानवर और वनस्पति देखने को मिलेंगी। इन सबको को देखने का सबसे अच्छा तरीका जंगल सफारी ही हैं। यह जैव विविधता सरिस्का टाइगर रिज़र्व के दो मुख्य गेट सरिस्का और तेलहा गेट के बीच में पाई जाती है जिसमें 4 जोन बने हुए हैं। जोन 1-4  जो की सरिस्का गेट से शुरू होता है में आपको बाघों के पैरों के निशान, हिरन और नीलगाय देखने को मिलेंगी। इन चार जोनों में आपको बाघ, हाथी, लकड़बग्घे, मगरमच्छ और कई जलस्रोत देखने को मिलेंगे। 

कंकवारी किला - कंकवारी किला सरिस्का टाइगर रिज़र्व के जोन 2 में स्थित हैं। यह किला सरिस्का टाइगर रिज़र्व के बीचों-बीच स्थित है जिसका निर्माण 17वी शताब्दी में महाराजा जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। क्योंकि कंकवारी किला सरिस्का के जोन 2 में पड़ता है जो की बाघिन ST-7 का भ्रमण इलाका हैं। यहाँ पर आप दोपहर के समय जाए ताकि आपको किले के साथ-साथ जीव-जंतु भी देखने को मिलें।   

पांडुपोल हनुमान मंदिर - यह मंदिर सरिस्का अभयारण्य के बीच में स्थित हनुमान जी का मंदिर है जिसका संबंध महाभारत काल से बताया जाता हैं। पांडवों ने एक वर्ष का अज्ञातवास यही काट था। जब दो पहाड़ियों ने उनकें रास्तें में अवरोध पैदा किया तो भीम ने अपनी गदा के प्रहार से दिया जिससे भीम को घमंड हो गया। भीम के इसी घमंड को हनुमान जी ने बूढ़े वानर का रूप धारण करके  पांडुपोल में ही तोडा था। इस मंदिर में हनुमान जी की शयन मुद्रा में मूर्ति बनी हुई हैं। 

नीलकंठ महादेव मंदिर - सरिस्का टाइगर रिज़र्व में स्थित यह मंदिर भगवन शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण आज से 1000 वर्ष पहले शासक मथनदेव दवरा बनवाया गया था।  इस मंदिर के साथ-साथ कई टूटे मंदिर ओर है जो की भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण (ASI ) के संरक्षण में आता हैं। 


सरिस्का टाइगर रिज़र्व घुमनें आने का सही समय 

सरिस्का टाइगर रिज़र्व में घूमने आने का सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच में रहता हैं। इस समय आप गर्मी से बच सकते हो क्योंकि मौसम सुहाना और ठंडा रहता हैं। इस मौसम में आपको बाघ और अन्य जंगली जानवर दिखने की संभावना रहती हैं। इसके अलावा आप मार्च से जून के बीच सरिस्का टाइगर रिज़र्व घुमनें आ सकते हो लेकिन इस समय गर्मी बहुत रहती हैं। क्योंकि गर्मी के मौसम में जंगल में घास और पेड़ों की पत्तियाँ सुख जाती है तो आपको जलस्रोतों के आस-पास आसानी से और दूर तक जंगली जानवर दिख जायेगे। अगर आप बाघ देखने आ रहे है तो गर्मी के दिनों में ही यहाँ आये क्योंकि उस दौरान आसानी से आपको बाघ नजर आ जाएंगे। 


सरिस्का टाइगर रिज़र्व में जंगल सफारी शुल्क,समय 

सरिस्का टाइगर रिज़र्व सफारी की दरें प्रति व्यक्ति के हिसाब से अलग- अलग हैं। अगर आप सरिस्का टाइगर रिज़र्व में जंगल सफारी करते हो तो आप 6 सीटर जीप या 20 सीटर कैंटर बुक कर सकते हो। सरिस्का टाइगर रिज़र्व में सफारी सरिस्का गेट से लेकर तेलहा गेट तक करवाई जाती है जिसमे 4 जोन बने हुए है। आप सरिस्का गेट और तेलहा गेट दोनों से सफारी बुकिंग करवा सकते हो। 

शुल्क 

6 सीटर जीप - ₹1,100 -₹1,300 प्रति व्यक्ति (भारतीय नागरिक)

                        ₹2,000-₹2,100 प्रति व्यक्ति (विदेशी नागरिक)

20 सीटर कैंटर - ₹800-₹900 प्रति व्यक्ति (भारतीय नागरिक)

                            ₹1,500-₹1,600 प्रति व्यक्ति (विदेशी नागरिक)

सरिस्का टाइगर रिज़र्व में जंगल सफारी का समय सुबह 06:30 AM से 10:00 AM और शाम को 02:30 PM से 6:00 PM तक रहता हैं। 

सरिस्का टाइगर रिज़र्व में सफारी करने में कुल 3.5 घंटे का समय लगता हैं। 

सरिस्का टाइगर रिज़र्व में हर बुधवार को सफारी बंद रहती हैं। 


रणथम्भौर अभयारण्य में क्या करे और क्या नहीं करें 

क्या करें 

  • सरिस्का टाइगर रिज़र्व में सफारी के दौरान अपने साथ गाइड लेकर जाए। 
  • सरिस्का में घुमनें के दौरान शांति बनाये रखें और  पर्याप्त पानी रखें। 
  • अभयारण्य में सफारी के दौरान प्रकृति से मेल खाते कपड़े पहने और जानवरों से दूरी बनाये रखें। 
  • अपने साथ दूरबीन रखे ताकि जंगली जानवर आसानी से देख सकें। 
  • सफारी के दौरान गाडी से बिलकुल न उतरे। 
  • गाइड और लिखें हुए निर्देशों की पालना करें। 

क्या न करें

  • जंगली जानवरों को खाना नहीं खिलाये 
  • अभयारण्य में पालतू जानवरों को साथ नहीं ले जाए। 
  • फ़्लैश फोटोग्राफी नहीं करें। 
  • अभयारण्य में धूम्रपान या शराब का सेवन नहीं करें।
  • अभयारण्य जोर से आवाज़ या सिटी नहीं बजाये। 
  • अभयारण्य में किसी भी जलकुंड में मछली पकड़ना और तैरना मना हैं। 
  • अभयारण्य में लड़की या किसी जानवर के सींग नहीं उठाये।

सरिस्का टाइगर रिज़र्व कैसे पहुँचे 

सरिस्का टाइगर रिज़र्व पहुँचने के लिए आप सड़क मार्ग और ट्रेन दोनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। क्योंकि अलवर तक बसों और ट्रेनों की कनेक्टिविटी बहुत शानदार और सुगम हैं। 
बस द्वारा - अगर आप सड़क मार्ग द्वारा सरिस्का टाइगर रिज़र्व घुमनें आ रहे है तो आपको निकटतम बस स्टैंड अलवर बस स्टैंड उतरना पड़ेगा। अलवर बस स्टैंड सरिस्का टाइगर रिज़र्व से मात्र 35-40 किलोमीटर दूर स्थित हैं। अलवर बस स्टैंड से आप स्थानीय बस या टैक्सी द्वारा 1 घंटे में सरिस्का पहुँच सकते हैं। 
ट्रेन द्वारा - आप ट्रेन से भी सरिस्का टाइगर रिज़र्व पहुँच सकते हैं। यहाँ तक पहुँचने के लिए आपको निकटम रेलवे स्टेशन अलवर जंक्शन उतरना पड़ेगा जो की सरिस्का टाइगर रिज़र्व से 37 किमी दूर स्थित हैं। यहाँ से आप बस या टैक्सी द्वारा सरिस्का टाइगर रिज़र्व पहुँच सकते हों। 
हवाई मार्ग - अगर आप प्लेन द्वारा सरिस्का टाइगर रिज़र्व आने की योजना बना रहे हो तो आपको सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरना पड़ेगा। जयपुर सरिस्का टाइगर रिज़र्व से 110-120 किमी दूर स्थित हैं। जयपुर से आप रोडवेज बस या खुद की गाडी से सरिस्का टाइगर रिज़र्व पहुँच सकते हो। 
सरिस्का टाइगर रिज़र्व जयपुर से 120 किमी, दिल्ली से 200 किमी दूर स्थित हैं। 

रणथम्भौर अभयारण्य के आस-पास

सिलीसेढ़ झील - अगर आप सरिस्का टाइगर रिज़र्व देखने आते हो तो सिलीसेढ़ झील देखने भी जा सकते हैं। यह झील सरिस्का टाइगर रिज़र्व से 35 किमी दूर स्थित हैं। यहाँ पर आप बोटिंग का आनंद लेते हुए झील का नजारा देखा सकते हैं। इस झील पर प्रवासी पक्षी और मगरमच्छ देखने को मिलेंगे। 
भानगढ़ किला - अलवर जिले का एक ऐसा किला जो भूतिया किला कहलाता है सरिस्का टाइगर रिज़र्व से मात्र 28 किमी दूर स्थित हैं। इस किले का निर्माण 17वी सदी में हुआ था। यह किला आज ASI के संरक्षण में आता हैं। अगर आप अलवर आते हो तो इस किले को देखें बिना नहीं जाए। 
बाला किला - यह किला सरिस्का टाइगर रिज़र्व से मात्र 42 किमी दूर स्थित हैं। इस किले को कुंवारा किला भी कहा जाता हैं। बाला किले का निर्माण 15वी शताब्दी में हसन खान मेवाती द्वारा करवाया गया था। 
चाँद बावड़ी - अगर आप सरिस्का टाइगर रिज़र्व घूमने आते हो तो राजस्थान के दौसा जिले के आभानेरी गाँव में स्थित चाँद बावड़ी जरूर आये। यह बावड़ी प्राचीन समय की वास्तुकला की एक अनौखी कलाकारी हैं। इसका निर्माण 9वी शताब्दी में हुआ था। यह एक उलटे पिरामिड के आकार की संरचना है लगभग 3,500 सीढ़िया बनाई हुई हैं। 
मूसी महारानी की छतरी - अलवर जिले में ही सरिस्का टाइगर रिज़र्व से मात्र 37 किमी दूर मूसी रानी की छतरी बनी हुई है जो देखने लायक हैं। यह छतरी महारजा बख्तर सिंह और रानी मूसी की प्रेम कहानी की निशानी हैं। 80 खम्भों पर बनी यह छतरी अदभुत हैं। 

इसके अलावा आप सरिस्का टाइगर रिज़र्व में नीलकंठ महादेव मंदिर, कंकवारी किला और पांडुपोल हनुमान मंदिर देख सकते हैं।  

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