भानगढ़ किला: अलवर कि भूतिया जगहों का रहस्यमयी किला
अलवर ज़िले में भानगढ़ किला राजस्थान के सबसे खूबसूरत खंडहरों में से एक है, जिसमें भारत के गौरवशाली इतिहास और डरावनी लोककथाओं का मेल है। 17वीं सदी में बना यह किला एडवेंचर पसंद करने वालों और भूतों की तलाश करने वालों, दोनों को अपनी टूटी-फूटी दीवारों की ओर खींचता है। आज, यह दुनिया भर में "भारत की सबसे डरावनी भूतिया जगह" के तौर पर बदनाम है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के एक खास आदेश से कानूनी तौर पर सुरक्षा मिली हुई है, जो सूरज डूबने और सूरज उगने के बीच किले में प्रवेश करने पर पूरी तरह रोक लगाता है। साल 1985 में किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा अपने अधीन ले लिया था। आज भी यह किला भारतीय पुरातत्व के संरक्षण में हैं।किसने बनवाया - भगवंत दासनिर्माण - 1573 ईस्वीकहाँ स्थित - भानगढ़ अलवरघूमने के लिए उचित समय - मानसून के बाद (सितम्बर - मार्च)एंट्री फीस - Rs. 20/- भारतीय नागरिकRs. 250/- विदेशी नागरिकसमय - सुबह 8 - शाम 5 बजे तककैसे पहुँचे - बस द्वारा 30 km ( दौसा बस स्टैंड )दौसा रेलवे स्टेशन ( 28 km )किसके अंतर्गत - भारतीय पुरातत्व विभाग ( ASI )आस-पास घूमने लायक जगह - चाँद बावड़ी (आभानेरी),सरिस्का टाइगर रिज़र्व,नीलकंठ महादेव मंदिर,कांकवाड़ी किला,सिलीसेढ़ झील,बाला क़िला,हर्षत माता मंदिर।
भानगढ़ किले का इतिहास और बनावट
राजस्थान के अलवर ज़िले में सरिस्का टाइगर रिज़र्व के किनारे पर बना भानगढ़ किला एक ऐसी जगह है जहाँ इतिहास, वास्तुकला और अलौकिक चीज़ें मिलती हैं। इसे 1573 में राजा भगवंत दास ने अपने छोटे बेटे माधो सिंह के लिए बनवाया था। मध्ययुगीन शहर शाहजहाँनाबाद की तरह बना भानगढ़, सिर्फ़ एक मिलिट्री गढ़ के बजाय एक शानदार शहरी बस्ती के तौर पर डिज़ाइन किया गया था। यह कभी 17वीं सदी की एक फलती-फूलती बस्ती थी जो आमेर की शान को टक्कर देती थी। 1613 ईस्वी में माधो सिंह ने इसे एक किलेबंद बस्ती में बदल दिया। भानगढ़ किले को जयपुर और मध्य इंडिया के बीच व्यापार मार्ग की सुरक्षा के लिए इसे अरावली पहाड़ियों पर खास जगह पर बसाया। उस दौर में भानगढ़ किला 9,000 से ज़्यादा घरों, महलों, बाज़ारों और मंदिरों के साथ एक हलचल भरे बस्ती के तौर पर खुशहाल था।
किले की बनावट की बात करे तो भानगढ़ का लेआउट चार बड़े गेट से होकर खुलता है: लाहौरी, अजनरख, फूलबाड़ी और दिल्ली। दरवाजों के हर गेट भूलभुलैया जैसे गलियारों, आंगनों और खूबसूरत इमारतों की ओर जाता है। भानगढ़ किले में एक शाही महल भी जो पहाड़ी की चोटी पर है, जहाँ से गोपीनाथ, सोमेश्वर, केशव राय और मंगला देवी जैसे मंदिर दिखते हैं।
भानगढ़ किले घूमने लायक जगह और कैसे घूमें
आज के समय में वैसे तो भानगढ़ किले की शोहरत इसके भूतिया पहचान से है। लेकिन फिर भी किले में घूमने के लिए कई पवित्र स्थान और वास्तुकला के प्रतीक मौजूद हैं। किले में देखने के लिए सबसे पहले पाँच मुख्य दरवाजें है जो की किले की मुख्य किलेबंदी का हिस्सा हैं। इन दरवाजों से होकर जाने का कर्म लाहौरी, अजमेरी, फूलबाड़ी, हनुमान और दिल्ली गेट हैं।
किले में अंदर ही एक चार मंजिला रॉयल पैलेस भी बना हुआ है जो की राजा माधो सींह द्वारा बनवाया गया था। शुरुआत में यह पैलेस सात मंजिला था जो की टूट फूट कर केवल चार मंजिला ही बचा हैं। इसी इमारत से अरावली रेंज का शानदार नज़ारा दिखता है।
किले में नागर शैली में बने कई सारे मंदिर है जिनमे से गोपीनाथ मंदिर प्रमुख है। गोपीनाथ मंदिर जो अपनी 14 फुट ऊँची चबूतरे और पत्थर की शानदार नक्काशी के लिए मशहूर है। मन्दिर के गर्भगृह तक 30 सीढिया है। यह मंदिर भगवन श्री कृष्ण को समर्पित हैं। वर्तमान समय में कोई मूर्ति नहीं हैं।
गोपीनाथ मंदिर के अलावा भानगढ़ किले में सोमेश्वर, हनुमान और मंगला देवी को समर्पित मंदिर भी हैं।
भानगढ़ किले में पुराने समय का जौहरी बाज़ार भी है जो महल तक जाने वाली एक लंबी, बिना छत वाली सड़क है। इस सड़क के किनारों पर दुकानों के खंडहर और नाचन की हवेली (डांसर का महल) है। यह बाजार शहर की पहले की आर्थिक और सांस्कृतिक खुशहाली का सबूत है।
भानगढ़ किले के अचानक उजड़ने के पीछे की वजह
स्थानीय कहानियाँ भानगढ़ के अचानक उजड़ने के दो मुख्य अलौकिक कारण बताती हैं:
जादूगर का जुनून: सिंघिया नाम के एक काले जादूगर को राजकुमारी रत्नावती से प्यार हो गया। उसने एक प्रेम औषधि से उनके परफ्यूम पर जादू करने की कोशिश की, लेकिन राजकुमारी को उसकी चाल पता चल गई और उसने बोतल एक पत्थर पर फेंक दी। पत्थर पड़ने से वह लुढ़क गया और जादूगर की तरफ बढ़ते हुए उसको कुचल दिया। जादूगर ने मरते समय किले और उसके निवासियों को श्राप दिया की यह किला जल्द ही पूरी तरह वीरान और तबाह हो जाएगा।
संत की परछाई:- कहा जाता है कि गुरु बालू नाथ नाम के एक तपस्वी ने इस शर्त पर किले को बनने दिया था कि उसकी परछाई कभी उनके ध्यान करने की जगह को न छुए। जब बाद में एक राजकुमार ने महल को सीधा बढ़ाया, तो परछाई संत के विश्राम स्थल पर पड़ी, जिससे उन्होंने शहर को बर्बाद करने का श्राप दे दिया।
वैज्ञानिक कारण:- अकाल और युद्ध
कहानियों से परे किले के वीरान होने की वजह पता करे तो इसका वैज्ञानिक कारण अकाल और युद्ध माने जाते हैं। 1630 में छत्र सिंह की मौत के बाद भानगढ़ की आबादी कम होने लगी। 1720 में राजा जय सिंह द्वितीय ने शहर पर कब्ज़ा कर लिया जिससे किले में किला डालने लगा। लेकिन 1783 में पड़े चालीसा अकाल ने शायद यहाँ की सारी आबादी तबाह कर दी, जिससे यह के लोगों को यह जगह पूरी तरह से छोड़नी पड़ी। चालीसा अकाल 1783-84 के बीच पड़ा एक भयानक सूखा और अकाल था जिसने दिल्ली, यूपी, पंजाब, राजस्थान और कश्मीर के क्षेत्रों को तबाह कर दिया।
भानगढ़ किले से जुड़े भूतिया पहलु
भानगढ़ किला भारत की सबसे डरावनी भूतिया जगह के तौर पर बदनाम है। इसलिए भानगढ़ किले में सूरज डूबने और सूरज उगने के बीच तक प्रवेश पूरी तरह बंद हैं। स्थानीय लोगो की मान्यता के अनुसार किले में रात्रि समय में आत्माओं का निवास रहता है। भानगढ़ किले की वजह से गाँव किले से दूर-दूर तक बसे हैं। स्थानीय लोग शाम ढलने के बाद किले से दूर रहते हैं। खासकर रोमांच पसंद करने वाले लोग भानगढ़ किले के पास में कैंपिंग करते हैं। भानगढ़ किले के इसी भूतिया पहलु की वजह से भारतीय पुरातत्व विभाग की तरफ से सूरज डलने के बाद प्रवेश को लेकर सख्त चेतावनी दी गई हैं।
भानगढ़ किले पर घूमने आने का सही समय
राजस्थान की गर्मी से बचने के लिए भानगढ़ किले पर आने का सबसे सही समय अक्टूबर और मार्च के बीच का हैं। किला सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता हैं। किले में भारतीय नागरिकों के लिए प्रवेश शुल्क 20/- प्रति व्यक्ति और विदेशी नागरिकों के 250 रुपये प्रति व्यक्ति हैं। किले में 15 वर्ष और उससे काम उम्र के बच्चें के लिए निशुल्क प्रवेश हैं। अगर आप भानगढ़ किला घूमने आते हो तो पर्याप्त कैश अपने साथ लाये क्योकि पहाड़ी इलाके की वजह से नेटवर्क समस्या आ सकती है।
भानगढ़ किले तक कैसे पहुंचे
भानगढ़ किला अलवर जिले की राजगढ़ तहसील में स्थित है। भानगढ़ किला जयपुर से लगभग 75 KM और दिल्ली से 235 KM दूरी पर स्थित हैं। यह किला वैसे तो अलवर जिले में आता है लेकिन यह अलवर से 85 KM दूर हैं। भानगढ़ किले के सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन दौसा रेलवे स्टेशन है जो की लगभग 28 KM दूरी पर स्थित हैं। सड़क मार्ग की बात करे तो सबसे नजदीक बस स्टैंड थानागाजी बस स्टैंड है जो की लगभग 20 KM दूर हैं। किले से दौसा बस स्टैंड भी मात्र 30 KM दूरी पर स्थित हैं।
अगर आप किले के आस पास ठहरने की व्यवस्था देखे तो सरिस्का के पास सिलिसेढ़ लेक पैलेस जैसे रिसॉर्ट आपके पास अच्छा विकल्प होगा। दूसरा आप दौसा में अपने बजट में गेस्टहाउस लेकर या होटल लेकर भी रुक सकते हो। दौसा से भानगढ़ किले तक पहुंचने में मात्र 30-40 मिनट लगते हैं।
भानगढ़ किले के आस-पास घूमने लायक जगह
चाँद बावड़ी (आभानेरी) - 9 वी शतब्दी में बनी यह बावड़ी भारत की सबसे बड़ी बावड़ी है जो की दौसा जिले के बांदीकुई में स्थित हैं। भानगढ़ किले की आभानेरी बावड़ी से दूरी 30 KM हैं।
सरिस्का टाइगर रिज़र्व - अलवर जिले में स्थित सरिस्का टाइगर रिज़र्व भानगढ़ किले मात्र 28 KM दूर हैं। अगर आप जंगल सफारी में बाघ, तेंदुए और वन्य जीव देखना चाहते है तो आप यह जा सकते हो।
नीलकंठ महादेव मंदिर - भगवन शिव समर्पित यह मंदिर सरिस्का के जंगलो में छुपा हुआ पुराना मंदिर है जो की 8वी शताब्दी में बनाया गया। यह मंदिर किले से लगभग 25-30 KM दूरी पर हैं ।
कांकवाड़ी किला - 17वी शताब्दी में आमेर के राजा मिर्ज़ा जय द्वारा 1611 में बनाया गया यह किला सरिस्का टाइगर रिजर्व के बीच स्थित हैं। इस किले पर ही औरंगजेब ने अपने भाई दारा शिकोह को कैद करके रखा था। यह किला कुम्भलगढ़ फोर्ट की तरह अरावली की पहाड़ियों की सुंदरता और हरियाली के बीच में हैं। कांकवाड़ी किला भानगढ़ फोर्ट से लगभग 41 KM दूरी हैं।
सिलीसेढ़ झील - यह भानगढ़ फोर्ट से लगभग 80 KM दूरी पर हैं। अरावली की पहाड़ियों के बीच में स्थित यह झील शांत और एक सुन्दर जगह हैं।
बाला क़िला - यह किला भानगढ़ किले से लगभग 96 KM दूर हैं।
हर्षत माता मंदिर - यह मंदिर आभानेरी बावड़ी पास के पास स्थित हैं। जो की भानगढ़ किले से 40 KM दूरी पर स्थित हैं।
