रणथम्भौर अभयारण्य: कैसे पहुँचे, सफारी शुल्क, और देखने लायक जगह

 रणथम्भौर अभयारण्य: बंगाल टाइगरों का घर 

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दुनिया भर में बाघों की संख्या में लगातार कम होने के वावजूद भी रणथम्भौर अभयारण्य एक मात्र ऐसा अभयारण्य है जो आज भी बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि करा रहा हैं। राजस्थान के सवाई माधोपुर में स्थित रणथम्भौर अभयारण्य बाघों की घनी आबादी के लिए प्रसिध्द हैं। रणथम्भौर अभयारण्य बाघों और प्रजाति को इतना भाता है की यहाँ पर इनकी संख्या में निरंतर वृध्दि होती हैं। बनास और चम्बल नदी के प्रवाह क्षेत्र में स्थित यह अभयारण्य रणथम्भौर किले की वजह से रणथम्भौर अभयारण्य कहलाता हैं। अगर आप रणथम्भौर अभयारण्य घुमनें जाने का प्लान बना रहे हो तो आप सही जगह आये हो। इस ब्लॉग में हम आपको रणथम्भौर अभयारण्य के बारे सारी जानकारी प्रदान करेंगे। 


स्थापना  - 1955 ईस्वी में सवाई माधोपुर गेम सैंक्चुअरी के रूप में 

                 1974 में बाघ अभयारण्य घोषित 

                 1980 में नेशनल पार्क घोषित 

क्षेत्रफल - 1,334 वर्ग किलोमीटर 

कहाँ स्थित - राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में 

घूमने आने का सही समय - अक्टूबर से फ़रवरी ( गर्मी से बचने के लिए )

                                          मार्च से जून (बाघों की साइटिंग के लिए )

सफारी के तरीके - 6 सीटर जीप 

                              20 सीटर कैंटर 

सफारी की दरें - 6 सीटर जीप ( ₹1,300 से ₹2,500 प्रति व्यक्ति )

                         20 सीटर कैंटर ( ₹1,200 से ₹1,800 प्रति व्यक्ति )

सफारी का समय - सुबह 06:30 AM से 10:00 AM, 

                              शाम 02:30 PM से 6:00 PM   

कैसे पहुँचे - बस द्वारा (10-15 किमी दूर माधोपुर बस स्टैंड )

                    ट्रेन द्वारा ( 10-12 किमी माधोपुर जंक्शन )

आस-पास - त्रिनेत्र गणेश मंदिर, रणथम्भौर किला, चौथ माता मंदिर(बरवाड़ा ), 

                    सूरवाल झील, कचीदा घाटी 


रणथम्भौर अभयारण्य की स्थापना 

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथम्भौर अभयारण्य बाघों के लिए जाना जाता हैं। रणथम्भौर अभयारण्य की स्थापना साल 1955 में सवाई माधोपुर गेम सैंक्चुअरी के रूप में हुई थी। शुरुआत में इसका क्षेत्रफल मात्र 282 वर्ग किलोमीटर ही था। लेकिन 1980 में जब यह एक नेशनल पार्क बना इसमें केलादेवी और सवाई मान सिंह अभयारण्य को शामिल कर लिया गया। जिससे रणथम्भौर अभयारण्य का विस्तार 1,334 वर्ग किलोमीटर में हो गया। रणथम्भौर अभयारण्य को साल 1974 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत बाघ अभयारण्य घोषित कर दिया गया। 

रणथम्भौर अभयारण्य का नाम 10 वी शताब्दी में बने रणथम्भौर किले के नाम के ऊपर रखा गया। इस किले का निर्माण चाहवान शासकों द्वारा किया गया। 


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रणथम्भौर अभयारण्य में क्या-क्या देखें 

बकाउला- रणथम्भौर अभयारण्य के मुख्य आकर्षक स्थलों में से बकाउला अभयारण्य का मुख्य स्थान है जहाँ पर बाघों की दिखने की संभावना सबसे अधिक रहती हैं। अगर आप रणथम्भौर अभयारण्य में जाए इस क्षेत्र में आपको बंगाल टाइगर के दिखने की संभावना सबसे अधिक रहेगी। यहाँ पर आपको जंगली जानवरों के लिए पानी के लिए बने जलकुंड हुए भी दिखेंगे, जिससे जंगली जानवरों के आने की संभावना सबसे अधिक रहती हैं। 

त्रिनेत्र गणेश मंदिर - रणथम्भौर अभयारण्य  में आपको भगवान गणेश का एक अनोखा मंदिर  बना हुआ है। रणथम्भौर अभयारण्य में स्थित भगवान गणेश का यह मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमे त्रिनेत्र गणेश जी की मूर्ति लगी हुई हैं। इस मंदिर का निर्माण 1299 ईस्वी में राजा हम्मीर देव ने करवाया था। आज भी शादी की प्रथम लगन-पत्रिका त्रिनेत्र गणेश जी के यह पहुँचाने की प्रथा हैं। 

लर्कदा और अनंतपुरा - अगर आप लकड़बग्घे और स्लोथ देखने के लिए उत्सुक हो तो रणथम्भौर अभयारण्य में सफारी के दौरान आप इस जगह पर पहुँचे। इस इलाक़े में आपको धारीदार लकड़बग्घे और भालू दिखाई देंगे। 

पदम तलाओ - रणथम्भौर अभयारण्य में जंगली जानवरों के अलावा झील और तालाब भी देखने की मिलेंगे।  पदम तलाओ पर आपको मगरमच्छ और छोटे शाकाहारी जानवर देखने को मिलेंगे। 

कचीदा घाटी - रणथम्भौर अभयारण्य में यह जगह तेंदुओं और स्लॉथ भालुओं के लिए प्रसिद्ध हैं। यह जगह मुख्य अभयारण्य से 10-12 किलोमीटर दूर स्थित हैं। यहाँ पर आपको तेंदुए बड़ी संख्या में देखने को मिलेंगे। 

मलिक तलाव - यह जगह पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग से कम नहीं हैं। मलिक तलाव के किनारे पर आपको अनेकों प्रजाति के पक्षी देखने को मिलेंगे। यहाँ पर आपको वनस्पति और मगरमच्छ भी देखने को मिलेंगे। 

राज बाग़ खंडहर - राज बाग रणथम्भौर अभयारण्य में पुरानी खंडहर संरचना है जो काफी प्राचीन है। यहाँ पर आप छोटा पानी का कुंड के पास खंडहर की खूबसूरती के साथ फोटोग्राफी कर सकते हैं। 

राजबाग तलाओ - इस जगह पर आपको प्राचीन संरचना और हरियाली दिखाई देगी। यह जगह एक खूबसूरत रमणीय स्थल है, जहाँ पर अक्सर आपको सांभर देखने को मिल जाएंगे। 

रणथम्भौर किला - रणथम्भौर अभयारण्य में स्थित यह किला रणथम्भौर किले के नाम से जाना जाता हैं। इस किले का निर्माण राजपूत शासकों ने 10वी शताब्दी में करवाया था। किले की अदभुत वास्तुकला देखकर साल 2013 में इसे विश्व धरोहर स्थल (UNESCO ) के रूप में शामिल किया गया। वर्तमान समय में रणथम्भौर किला भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण के संरक्षण में आता हैं। 


रणथम्भौर अभयारण्य घुमनें आने का सही समय 

रणथम्भौर अभयारण्य घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून के बीच रहता हैं। क्योंकि इस समय जंगल में हरियाली गर्मी की वजह से खत्म हो जाती है जिससे बाघ और अन्य जंगली जानवर सफारी के दौरान आसानी से दिख सकते हैं। गर्मी से बचाव के लिए आप रणथम्भौर अभयारण्य अक्टूबर से फ़रवरी के बीच घूमने आ सकते हैं। जुलाई से सितम्बर के बीच पार्क के जॉन 1 से 5 तक बंद रहते हैं। 


रणथम्भौर अभयारण्य में जंगल सफारी शुल्क, समय 

रणथम्भौर अभयारण्य में जंगल सफारी की दरें प्रति व्यक्ति के हिसाब हैं। रणथम्भौर अभयारण्य में आप जंगल सफारी के लिए 6 सीटर जीप और 20 सीटर कैंटर बुक कर सकते हो। रणथम्भौर अभयारण्य में सफारी के लिए 6 सीटर जीप के लिए आपको ₹1,300 से ₹2,500 प्रति व्यक्ति और 20 सीटर कैंटर के लिए ₹1,200 से ₹1,800 के बीच शुल्क देना पड़ता हैं। 

रणथम्भौर अभयारण्य में सफारी के लिए टाइम महीनों के हिसाब से अलग-अलग रहता हैं। 

शुल्क 

6 सीटर जीप - ₹1,300 से ₹2,500 प्रति व्यक्ति ( भारतीय नागरिक )

                       ₹5000+ ( विदेशी नागरिक )

20 सीटर कैंटर - ₹1,200 से ₹1,800 प्रति व्यक्ति (भारतीय नागरिक )

                        -  ₹4500 + ( विदेशी नागरिक )

रणथम्भौर अभयारण्य में सफारी का समय सुबह 06:30 AM से 10:00 AM और शाम को 02:30 PM से 6:00 PM तक रहता हैं। 


रणथम्भौर अभयारण्य में क्या करे और क्या नहीं करें 

क्या करें 

  • रणथम्भौर अभयारण्य में सफारी के दौरान अपने साथ गाइड लेकर जाए। 
  • अभयारण्य में घुमनें के दौरान शांति बनाये रखें और  पर्याप्त पानी रखें। 
  • अभयारण्य में सफारी के दौरान प्रकृति से मेल खाते कपड़े पहने और जानवरों से दूरी बनाये रखें। 
  • अपने साथ दूरबीन रखे ताकि जंगली जानवर आसानी से देख सकें। 
  • सफारी के दौरान गाडी से बिलकुल न उतरे। 
  • गाइड और लिखें हुए निर्देशों की पालना करें। 

क्या न करें 

  • जंगली जानवरों को खाना नहीं खिलाये 
  • अभयारण्य में पालतू जानवरों को साथ नहीं ले जाए। 
  • फ़्लैश फोटोग्राफी नहीं  करें। 
  • अभयारण्य में धूम्रपान या शराब का सेवन नहीं करें। 
  • अभयारण्य जोर से आवाज़ या सिटी नहीं बजाये। 
  • अभयारण्य में किसी भी जलकुंड में मछली पकड़ना और तैरना मना हैं। 
  • अभयारण्य में लड़की या किसी जानवर के सींग नहीं उठाये। 


रणथम्भौर अभयारण्य कैसे पहुँचे 

रणथम्भौर अभयारण्य पहुँचने के लिए आप बस, ट्रेन या हवाई मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। 

बस द्वारा - रणथम्भौर अभयारण्य पहुँचने के लिए आप बस मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। यहाँ तक पहुँचने के लिए आप निकटम बस स्टैंड सवाई माधोपुर बस स्टैंड पर उतरकर रणथम्भौर अभयारण्य पहुँच सकते हैं। रणथम्भौर अभयारण्य से बस स्टैंड मात्र 10-15 किलोमीटर दूर स्थित हैं। 

ट्रेन द्वारा - रणथम्भौर अभयारण्य के पास सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर जंक्शन है जो मात्र 10-11 किलोमीटर दूर स्थित हैं। यहाँ से आप अभयारण्य तक पहकहने के लिए बस या टैक्सी का उपयोग कर सकते हैं। 

हवाई मार्ग द्वारा - रणथम्भौर अभयारण्य आप हवाई मार्ग से भी पहुँच सकते हैं। जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे नजदीक एयरपोर्ट है जो रणथम्भौर से मात्र 170 KM दूर स्थित हैं। यहाँ से आप बस या ट्रेन द्वारा सवाई माधोपुर पहुँच सकते हैं। 

रणथम्भौर अभयारण्य से जयपुर 170 किमी, कोटा 110 किमी और दिल्ली 380 किमी दूर पर स्थित हैं। 


रणथम्भौर अभयारण्य के आस-पास 

त्रिनेत्र गणेश मंदिर - रणथम्भौर अभयारण्य के पास गणेश भगवान की त्रिनेत्र मूर्ति वाला मंदिर है जो की एक अनोखा हैं। 

रणथम्भौर किला - रणथम्भौर अभयारण्य के पास रणथम्भौर किला है जो 10वी शताब्दी में राजपूत शासकों द्वारा बनवाया गया था। 

चौथ का बरवाड़ा - सवाई माधोपुर के पास ही बरवाड़ा गाँव में स्थित एक खूबसूरत चौथ माता का मंदिर हैं। जिसका निर्माण 1451 ईस्वी में किया गया था। इसी जगह पर भगवान देव नारायण और मीन भगवान का मंदिर बना हुआ हैं।  

सूरवाल झील - माधोपुर से लगभग 25 किमी दूर स्थित यह जगह पक्षी प्रेमियों के लिए देखने लायक हैं। यहाँ पर आपको अलग-अलग प्रजाति के पक्षी देखने को मिलेंगे।

कचीदा घाटी - सवाई माधोपुर से 10-12 किमी दूर स्थित यह जगह पैंथरों और स्लॉथ भालुओं के लिए प्रसिध्द हैं। 


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