लाल किला: दिल्ली का लाल चमकता इतिहास

 दिल्ली का लाल किला:स्वतंत्रता की धरोहर

red fort delhi


भारत की राजधानी का एक चमकता इतिहास जो आज पुरे विश्व भर में अपनी शान बिखेरे हुए। दिल्ली का लाल किला मुग़लो की कलाकारी का एक अदभुत नगीना है जिसकी चमक आज भारत के इतिहास में हैं। वैसे तो मुघलो ने अपने शासनकाल में अनेकों किले, मस्जिदें बनवाई है लेकिन दिल्ली के लाल किले का भारत के इतिहास से बहुत गहरा सम्बन्ध रहा हैं। जब इस किले का निर्माण किया गया था उस जगह को शाहजहानाबाद कहा जाता था जो की वर्तमान समय में पुरानी दिल्ली के नाम से जाना जाता हैं। लाल किले का संबंध भारत की स्वतंत्रतासे भी रहा है। क्योंकि जब भारत आजाद हुआ था तो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लाहौरी गेट पर तिरंगा पहनाया था। वर्तमान समय में यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में आता हैं। वर्तमान समय में यह किला भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण के संरक्षण में आता हैं। इस ब्लॉग में हम लाल किले के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। 


किसने बनवाया - शाहजहाँ 
कब बना - 1648 ईस्वी में 
कहा स्थित - पुरानी दिल्ली 
बनने में लगा समय - 10 वर्ष 
खुलने का समय - सूर्योदय से सूर्यास्त तक ( सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक)
किसके संरक्षण में - भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भारत सरकार। 
                                विश्व धरोहर स्थल (UNESCO)
एंट्री फीस - Rs. 40/- भारतीय नागरिक (Rs. 35/- ऑनलाइन)
                  Rs. 600/- विदेशी नागरिक (Rs. 550/- ऑनलाइन )
ऐतिहासिक महत्व - 500 रुपये के नोट के पीछे लाल किला बना हुआ है 
                               15 अगस्त 1947 को पहली बार तिरंगा फहराया गया। 
                                पहला मुकदमा लाल किले में चला ( लाल मुकदमा                                 
कैसे पहुँचे - बस, मेट्रो, ट्रेन और प्लेन 
क्या-क्या देखे - लाहोरी दरवाज़ा, दिल्ली दरवाज़ा, छत्ता चौक, नौबत खाना
                          दीवान-ए-आम, मुमताज़ महल, रंग महल, खास महल
                          दीवान-ए-खास, हम्माम,मोती मस्जिद,हीरा महल
                           हयात बख्श बाग़, शहजादों का निवास
आस-पास - जामा मस्जिद, श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर, राजघाट, फतेहपुरी मस्जिद 
                     मिना बाजार, गौरी शंकर मंदिर


लाल किले का निर्माण और इसकी बनावट 

दिल्ली के लाल किले का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने अपने शासन में करवाया था। मुग़ल शासक शाहजहाँ के आदेश पर 1638 में इस किले का काम शुरू किया गया। इसका निर्माण लगभग 10 वर्ष में पूरा हुआ था। लाल किले की बनावट का श्रेय उस्ताद अहमद लाहौरी को दिया जाता हैं। इस किले का निर्माण शाहजहाँ ने राजधानी आगरा से दिल्ली लाने के फैसले के बाद किया था। लाल किले का निर्माण मुख्यत: लाल और सफ़ेद डिजाइनों में किया गया हैं। यह किला 6 अप्रैल 1648 को बनकर तैयार हुआ था। लाल किले ने समय के साथ अनेकों आक्रमणों और शासकों को झेला है इसलिए किले के गई हिस्से उसकी पुरानी स्थिति मे नहीं हैं। 
लाल किले की बनावट की बात करे तो यह किला अष्टाकार आकृति में बना हुआ हैं। किले की बाहरी दिवारे बाकी शेष मुग़ल किलों से उल्ट असमित हैं। किले की बनावट में फ़ारसी और तैमूरी संरचना दोनों का समावेश हैं। किले की दीवारें लगभग 2.5 किलोमीटर तक लम्बी जाती हैं। किला लगभग 255 एकड़ के क्षेत्रफल में फैला हुआ हैं। क्योंकि यह किला यमुना नदी के तट पर है तो इस किले की दीवारें नदी और शहर दोनों तरफ अलग-अलग ऊँचाई की बनी हुई हैं। शहर की तरफ से दीवारों की ऊँचाई 33 मीटर और नदी की तरफ से इसकी ऊँचाई 18 मीटर है। 


लाल किला दिल्ली का इतिहास 

दिल्ली के लाल किला का इतिहास तब से शुरू होता है जब से सम्राट शाहजहाँ ने इस किले के निर्माण का आदेश दिया था। जब किला 1648 में पूर्णरूप से बनकर तैयार हुआ था तब मुग़ल साम्राज्य अपने स्वर्णिम काल में था। 1739 में किले पर जब पहली बार नादिर शाह ने आकर्मण किया था तो उसमे यहाँ पर भारी लूट मचाई थीं। नादिर शाह इस लूट में अपने साथ मयूर सिंहासन भी ले गया था। लाल किले पर मराठों से लेकर अंग्रेज़ों ने लूट मार की थी। जिससे किले के कुछ भाग उस समय पर तहस-नहस हो गए थे। जब 1760 में मराठाओं द्वारा किले पर कब्ज़ा किया और किले में बने दीवान-ए-खास पर लगी चाँदी को पिघला लिया गया । 1765 में भरतपुर के शासकों ने लाल किले पर हमला करके जिसमें वो मुग़ल सिंहासन और किले के दरवाजे ले गए। किले के दरवाजे आज भी भरतपुर के लोहागढ़ किले में तथा मुग़ल सिंहासन डीग के महल में स्थित हैं। 18वी शदी में जब गुलाम कादिर ने दिल्ली को लूटा तब मराठों ने पीछा करते हुए कादिर का सिर काट दिया था। इसके बाद 1803 में पहली बार लाल किले पर मराठा झंडा को पहनाने की अनुमति मिली। इसके बाद जब अंतिम मुगल बादशाह, बहादुर शाह ज़फ़र ने अंग्रेजों के कंपनी शासन का विरोध किया। इस विरोध को दबाने के लिए बहादुर शाह ज़फ़र को अंग्रेजों ने पकड़ा और मुकदमा चलाया। 1947 में ही जवाहर लाला नेहरू ने लाल किले पर ही पहली बार झंडा पहनाया था। 
स्वतंत्रता के बाद लाल किला ज़्यदातर छावनी के तौर पर काम आता था। लाल किले में ही देश का पहला मुकदमा चलाया गया। जो की नवंबर और दिसंबर महीने में चलाया गया। इस मुकदमें को लाल मुकदमा भी कहा जाता हैं। जो की INA के अधिकारियों  से जुड़ा हुआ था। आज़ादी के दिन 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री जवाहर लाला नेहरू ने लाल किले के लाहौरी गेट पर ही पहली बार तिरंगा पहनाया था। इसके बाद किले का उपयोग सेना छावनी के तौर होने लगा। लाल किला 22 दिसंबर 2003 तक सेना के अधीन रहा और इसके बाद किला ASI के संरक्षण में आ गया।  साल 2007 में लाल किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन आ गया। वर्तमान समय में यह किला विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित हैं। 

लाल किला पर किस-किस का शासन रहा 

मुग़लों का शासन - लाल किले का निर्माण ही मुग़ल शासक शाहजहाँ ने करवाया था। इसलिए शुरुआत से ही लाल किला मुग़लों के अधीन रहा हैं। 1648 से लेकर 1738 तक लाल किले पर कोई खास आक्रमण नहीं हुए। लेकिन साल 1739 में नादिर शाह ने लाल किले पर आक्रमण किया और किले में लूट मचाई। नादिर शाह ने उस समय 2 लाख की मुग़ल सेना को हराकर लाल किले से मयूर सिहासन लूट ले गया। इसके बाद मुग़ल बादशाह शाह आलम द्वितीय को दिल्ली के शासन पर बिठाने की मांग हुई। लेकिन गुलाम कादिर ने दिल्ली पर आक्रमण किया और लूट की। जिसमे शाही परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी गई। 1788 में मराठों द्वारा गुलाम कादिर की हत्या कर दी गई। अंतिम मुग़ल शासक बहादुर शाह जफ़र थे। 

मराठों का शासन - मुगलों के शासन कल में ही मराठों ने इनकी कई बार सहायता की। औरंगजेब के मरने के बाद मुग़ल शासन बहुत कमजोर हो गया था। नादिर शाह ने दिल्ली पर आकर्मण करके खूब लूटा। फिर 1752 में हुई संधि के दौरान मराठा मुग़लों के रक्षक बने। मराठों ने अफगानों के साथ लड़ाई भी लड़ी और जीत पाई। इसके बाद पानीपत के युध्द में मराठों को हार मिली और अहमद शाह दुर्रानी के साथ विवाद और बढ़ गया। मराठों ने पानीपत की तीसरी लड़ाई में अफगानी लड़ाकों को हराकर शाह आलम द्वितीय को सिंहासन  पर बैठाया। उस समय मराठा सेना के कमांडर महादजी शिंदे थे। दिल्ली सल्तनत के लिए मराठों की अंतिम लड़ाई दौलत राव सिंधिया ने लड़ी थी। 

जाटों का शासन - पानीपत की तीसरी लड़ाई के बाद 1764 में भरतपुर के जाट शासक महाराजा जवाहर सिंह ने दिल्ली पर हमला किया। कड़ी म्हणत के बाद 5 फ़रवरी 1765 को जाटों ने लाल किले पर कब्ज़ा कर लिया और मुग़लों से नजराना वसूला। दो दिन वसूली करने के बाद जाटों ने अपनी सेना लाल किले से हटा ली। जाट अपने साथ मुग़ल सिंहासन  और किले के दरवाज़ें अपने साथ ले गए। वर्तमान समय में मुग़ल सिंहासन डीग महल की शोभा बढ़ा रहा है और लाल किले के दरवाज़े भरतपुर के लोहागढ़ किले में स्थित हैं। 

अंग्रेजों का शासन - 1803-1805 के द्वितीय आँग्ला-मराठा के दौरान अंग्रेजों ने मराठों को हराकर लाल किले से मराठों का कब्ज़ा खत्म कर दिया। द्वितीय आँग्ला-मराठा युध्द के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुग़लों का शासन अपने हाथों में ले लिया और लाल किले में एक रेजिडेंट बना दी। अंग्रेज़ों के इस कंपनी शासन  विरोध अंतिम मुग़ल शासक बहादुर शाह जफ़र ने किया, लेकिन उनपर मुकदमा चलाया गया। इसके बाद बहादुर शाह जफ़र को अंग्रेज़ों ने रंगून भेज दिया। बहादुर शाह जफ़र के सानिध्य में उठा विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेज़ों लाल किले को तोड़ने का फरमान जारी कर दिया। किले की ज़्यदातर इमारतें तोड़ दी गई। कील के बगीचे सब उजाड़ दिए गए। इसके बाद लार्ड कर्जन भारत के वायसराय बने और उन्होंने 1899 से 1905 के बीच लाल किले का जीर्णोध्दार करवाया।

लाल किला कौन-कौन सी महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा 

पहला आक्रमण - लाल किले पर पहला आक्रमण 1739 में नादिर शाह ने किया था। जिसमे वह किले से बहुत सारी कीमती चीज़े और मयूर सिंहासन अपने साथ ले गया। 
1857 में कंपनी शासन का विद्रोह - द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद जब अंग्रेजों ने सभी मुग़ल क्षेत्रों का प्रशासन अपने हाथों में ले लिया था तो बहादुर शाह जफ़र ने कंपनी शासन के विरोद में आवाज़ उठाई। 
लाल मुकदमा - साल 1945-1946 के बीच दिल्ली के लाल किले में आज़ाद हिन्द फ़ौज के सैनिकों के खिलाप पहली बार एक कोर्ट मार्शल चलाया गया। जिसको लाल किला मुकदमा कहा जाता हैं। 
पहली बार तिरंगा - जब भारत 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ था तो उस समय भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लाल किले के लाहोरी गेट पर पहली बार तिरंगा पहनाया था। आज भी स्वतंत्रता दिवस पर हर वर्ष देश के प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर तिरंगा पहनाया जाता हैं। 
साल 2000 का आतंकी हमला - क्योकि साल 2000 में भारत-पाकिस्तान के बीच शांति बार्ता चल रही थी। इसलिए इस बार्ता को सफल नहीं होने देने के इरादे से लाल किले पर 22 दिसंबर 2000 को एक आतंकी हमला करवाया गया । जिसको करने की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा ने ली थी। इस हमले में दो सैनिक मारे गए थे। 
2021 का किसानों का विरोध प्रदर्शन - साल 2021 में किसानों ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर लाल किले में विरोध किया। जिसमे आंदोलनकारी किले के गुम्बदों पर चढ़कर धार्मिक झंड़े लगा रहे थे। 

लाल किले में क्या देखें 

  • लाहोरी दरवाज़ा
  • दिल्ली दरवाज़ा
  • छत्ता चौक
  • नौबत खाना
  • दीवान-ए-आम
  • मुमताज़ महल
  • रंग महल
  • खास महल
  • दीवान-ए-खास
  • हम्माम
  • मोती मस्जिद
  • हीरा महल
  • हयात बख्श बाग़
  • शहजादों का निवास

लाल किले का खुलने का समय और एंट्री फीस नियम 

दिल्ली का लाल किला एक विश्व धरोहर स्थल है जो की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भारत सरकार के संरक्षण में आता हैं। यह किला सूर्योदय (घूमने के हिसाब से 8 बजे ) शाम 9 बजे तक खुला रहता हैं। क्योकि लाल किले पर लाइट एंड साउंड शो होता इसलिए यह 9 बजे तक खुला रहता हैं। 
लाल किले पर भारतीय नागरिकों के लिए एंट्री फीस Rs. 40/- प्रति व्यक्ति ( ऑनलाइन बुक करने पर Rs. 35/-) लगता हैं। वही विदेशी नागरिको के लिए Rs. 600/- प्रति व्यक्ति (ऑनलाइन बुक करने पर Rs. 550/-) लगता हैं। 
  • किले में 15 वर्ष या उससे काम उम्र के बच्चें निःशुल्क हैं। 
  • किले में शूटिंग बिना ASI की अनुमति के नहीं कर सकते। 
  • अगर कैमरा साथ लेके जाते है तो Rs. 25 की पर्ची कटवानी पड़ेगी। 
  • किले परिसर में ड्रोन उड़ाना सख्त मना हैं। 
  • भीड़ से बचने के लिए ASI की वेबसाइट से ऑनलाइन टिकट बुक करे 

लाल किला घूमने आने का सही समय 

दिल्ली के मौंसम के हिसाब से लाल किला घूमने का सही समय अक्टूबर-मार्च के बीच का होता हैं। क्योंकि इस समय दिल्ली की गर्मी से आप बच सकते हो। अगर आप लाल किला घूमने आते हो तो सीजन में आने से बचे क्योकि इस दौरान यह भीड़ ज़्यादा रहती हैं। दिल्ली में लाल किलें तक पहुँचने के लिए अपनी खुद की गाडी कें बजाय मेट्रो का उपयोग करे। इससे आप दिल्ली में लगने वाले ट्रैफिक जाम से बच सकते हैं। 

लाल किला कैसे पहुँचे 

दिल्ली के लाल किले तक पहुँचने तक आप ट्रेन, बस या प्लेन द्वारा आ सकते हैं। दिल्ली में आने के बाद आप मेट्रो से लाल किला पहुँच सकते है। क्योकि दिल्ली में ट्रैफिक से बचने के लिए मेट्रो सबसे आसान रास्ता हैं। 

ट्रेन द्वारा - अगर आप ट्रैन के रास्ते लाल किला देखने आ रहे हो तो आपको सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन दिल्ली जंक्शन या नई दिल्ली रेलवे स्टेशन उतरना पड़ेगा। दिल्ली जंक्शन के  नजदीक मेट्रो स्टेशन चाँदनी चौक से आप वायलेट लाइन पर जा कर लाल किला मेट्रो स्टेशन पहुँच सकते हैं।  लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 4 से बाहर निकलने पर आप सीधे किले पर पहुँच जाओगे। 
बस द्वारा - अगर आप बस द्वारा लाल किला घूमने आने का प्लान बना रहे हो तो सबसे नजदीकी बस स्टैंड कश्मीरी गेट उतरना पड़ेंगा। यहाँ से आप कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन से लाल किला मेट्रो स्टेशन (वायलेट लाइन ) के लिए बैठ सकते हो। लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 4 से बाहर निकलने पर आप सीधे किले पर पहुँच जाओगे। 
प्लेन द्वारा - अगर आप प्लेन द्वारा लाल किला घूमने आ रहे हो तो सबसे नजदीक एयरपोर्ट इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरना पड़ेगा। यहाँ से आप टैक्सी या मेट्रो के द्वारा लाल किले पर पहुंच सकते हो। 

लाल किले के आस-पास घूमने लायक जगह 

जामा मस्जिद - जमा मस्जिद लाल किले से मात्र एक किलोमीटर दूरी पर स्थित हैं। इसको भी मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाया था। यह मस्जिद लाल किले के पास ही स्थित है जहाँ पर आप पैदल चलकर पहुँच सकते हैं। 
राज घाट - लाल किला से 3 किलोमीटर दूर स्थित महात्मा गाँधी की समाधि स्मारक बना हुआ हैं। इसे राजगढ़ के नाम से जाना जाता हैं। 
श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर - लाल किले के पास ही दिगम्बर जैन लाल मंदिर स्थित है जहाँ आप पैदल चलकर भी हैं। ये मंदिर 1656 में बनाये गए थे। 
फतेहपुरी मस्जिद - फतेहपुरी मस्जिद लाल किले से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।  इस मस्जिद का निर्माण शाहजहाँ की पत्नी फ़तेहपुरी बेगम ने 1650 ईस्वी में करवया था। 







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