मेहंदी पुर बालाजी: नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति का अटूट केंद्र

 मेहंदी पुर बालाजी: आस्था का एक अनोखा केंद्र 

mehndi pur balaji temple


राजस्थान के दौसा जिले में स्थित एक ऐसा मंदिर जो वर्तमान समय में भुत प्रेत के साये से दूर करने के मामले में प्रख्यात हैं। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है जिसको मेहंदी पुर बालाजी के नाम से जाना जाता हैं। यह मंदिर वर्तमान समय में आस्था का बहुत बड़ा केंद्र बन चूका हैं। मेहंदी पुर बालाजी में साल भर में लाखों श्रध्दालु अपनी मनोकामना लेकर आते हैं। यह मंदिर जयपुर आगरा हाईवे के पास स्थित होने से यहाँ श्रध्दालुओ का जमाबड़ा लगा रहता हैं। आज के समय में यह मंदिर लोगों के अंदर नकारात्मक ऊर्जा, भुत-प्रेत और अद्रश्य शक्तिओं के प्रभाव से लोगो को मुक्त करने के लिए बहुत चर्चित हैं। इस मंदिर में दर्शन करने और इसके प्रसाद को लेकर बहुत सख्त नियम हैं। मंदिर दर्शन करने आने से पहले कुछ नियम आपको बनाने पड़गे। अगर आप इस मंदिर में दर्शन करनें आने की योजना बना रहे हो तो आप बिल्कुल सही जगह आये हो। इस ब्लॉग में हम मंदिर दर्शन से लेकर जुडी सभी बातो के बारें में विस्तार से चर्चा करेंगे। 

निर्माण - 1000 साल पूर्व 

कहाँ स्थित - दौसा जिले के सिकराय तहसील के मेहंदीपुर गाँव में 

कैसे पहुँचे - बस, ट्रेन द्वारा 

सुबह की आरती - 6:00 बजे - 6:40 बजे तक 

सुबह दर्शन - 7:00 बजे - 11:00 बजे तक

दोपहर में दर्शन - 12:00 बजे - 6:50 बजे तक

शाम की आरती - 6:00 बजे - 6:40 बजे तक

शाम को बंद होने का समय - रात्रि  9:00 बजे 

नोट :- हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को बालाजी के चोला चढ़ाया जाता है इसलिए शाम 4:00 बजे से  6:00 बजे तक दर्शन बंद रहते हैं। 

मेहँदी पुर बालाजी मंदिर का निर्माण और अवतरण के पीछे की कहानी

माना जाता है की इस मंदिर का निर्माण लगभग 1000 साल पहले हुआ था। कहा जाता है की मेहंदी पुर बालाजी में स्थित यह मूर्ति स्वयंभू है अर्थात यह स्वयं प्रकट हुए हैं। मंदिर के गर्भगृह में स्थित हनुमान जी की मूर्ति को लेकर एक आध्यत्मिक कथा हैं। यह कहानी बालाजी महाराज के स्वयं प्रकट होने को लेकर हैं। कहानी यह है की श्री महंत जी (जो लम्बे समय से मंदिर की पुर्जा अर्चना करते आ रहे है ) के पूर्वज गोसाई महाराज को रात्रि समाया में एक सपना आया जिसमे उन्हें एक अद्भुत लीला दिखाई दी। उन्होंने देखा की हाथी घोड़े से सुसज्जित एक बहुत बड़ी सेना उनकी तरफ आ रही हैं। उस सेना ने बालाजी महाराज, श्री प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा को प्रणाम किया और वापस उसी रास्ते पर लौट गई। ये सब देखकर गोसाई महाराज दर गए और घर लौट गए। फिर गोसाई महाराज को बार बार यही आवाज सुनाई दने लगी। लेकिन गोसाई महाराज ने इस बातो पर ध्यान नहीं दिया। अंत में बालाजी महाराज ने गोसाई महाराज को साक्षात दर्शन दिए और उन्हें सेवा पूजा करने को कहा। अगले दिन गोसाई महाराज स्वप्न में दिखी दो पहाड़ियों के बीच स्थित मूर्तियों के पास पहुँचे। वह पर उन्हें ढोल नगाड़ो की आवाज़ सुनाई दे रही थी लेकिन कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। ये सब देख कर उन्होंने गांव वालो को इकठ्ठा किया और सब कुछ बताया। फिर गांव वालो ने यह पर प्रसाद की व्यवस्था कि। तब से लेकर अब तक इस जगह पर और उसी मूर्ति की पूजा बालाजी महाराज के रूप में होती हैं। 

क्योंकि मेहंदी पुर बालाजी मंदिर दो पहाड़ियों के बीच स्थित है इसलिए इसे ठीले के बालाजी के नाम से भी जाना जाता हैं। 


मेहंदी पुर बालाजी मंदिर के दर्शन कैसे करे 

मेहंदी पुर बालाजी मंदिर परिसर में प्रवेश करने करने लाइन में लगते हुए बालाजी महाराज का नाम जपते चले। मंदिर में प्रवेश करते ही सबसे पहले आपको बालाजी महारज के दर्शन करने हैं जिनकी प्रतिमा बीच में स्थापित हैं। आपको बता दे की मेहंदी पुर बालाजी में स्थापित यह मूर्ति किसी कलाकार ने नहीं बनाई है यह स्वयं धरती से प्रकट हुए हैं।  बालाजी महाराज के दर्शन करने के बाद इनके पास ही इनके कोतवाल श्री भैरव बाबा के दर्शन करने होते हैं। क्योंकि भैरव बाबा का स्थान बालाजी महाराज से नीचे बना हुआ है इसलिए इनके दर्शन आपको झुक कर करने है। बालाजी महाराज के पास में ही श्री प्रेतराज सरकार का स्थान है यह आपको दर्शन करने होते हैं। प्रेतराज सरकार के यहा भूतों की पेशी की जाती हैं। 

सीता-राम मंदिर - इसके अलावा मंदिर परिसर और कई मंदिर है जिनके आप दर्शन कर सकते हैं। श्री बालाजी महाराज के बिलकुल सामने श्री राम मंदिर बना हुआ हैं। इस मंदिर में श्री राम और माता सीता की प्रतिमा लगी हुए हैं। 

राधा-कृष्ण मंदिर - इसी मंदिर परिसर में भगवान कृष्ण और राधा का मंदिर भी है। जिसमे कान्हा जी और राधा जी की मनमोहक प्रतिमा लगी हुइ हैं। यहाँ पर भी आप दर्शन कर सकते हैं। 

समाधी वाले बाबा का मंदिर - मंदिर परिसर में ही समाधी वाले बाबा का भी मंदिर बना हुआ है जहाँ आप दर्शन कर सकते हैं। इस मंदिर के पास दो पेड़ बड़े रहस्यमयी है जिसमें एक पीपल का पेड़ है जिसकी लोग परिक्रमा करते है। दूसरा पेड़ नीम का है जिसमे कई बड़ी बड़ी थालिया लगी हुए हैं। 

तीन पहाड़ी मंदिर -  यह मंदिर बालाजी मंदिर के बिल्कुल सामने स्थित हैं। क्योंकि यह मंदिर तीन पहाड़ियों के बीच बना हुआ है इसलिए इसे तीन पहाड़ी मंदिर कहते हैं।  

हनुमानजी की प्रतिमा - बालाजी मंदिर के पास ही 300 मीटर दूरी पर हनुमानजी की एक विशालकाय प्रतिमा बानी हुए जिसकी ऊँचाई लगभग 151 फ़ीट हैं। यहाँ पर आप प्रतिमा के साथ फोटग्राफी कर सकते हैं। 

सुरसा गुफा - इसी प्रतिमा के पास सुरसा गुफा भी बनी हुई हैं। सुरसा वही राक्षसी थी जिसने हनुमान जी का समुंद्र में रास्ता रोका था। इस गुफा के अंदर बहुत ख़बसूरती से रामायण के पात्रों को स्थापित किया गया हैं। यहाँ आप फोटोग्राफी का आनंद ले  सकते हैं। 

बालाजी मंदिर के बाई और पतली गलियों में जाने पर आपको छोटे-छोटे मंदिर मिलेंगे जिनमे काली माता, हनुमान जी और शिव जी के मंदिर हैं। काली माता के मंदिर एक में अनोखी प्रथा भी है। यहाँ पर सिर पर निम्बू रख कर कटवाया जाता है। अगर आप चाहते हो तो आप भी कटवा सकते हो। 

मेहंदी पुर बालाजी मंदिर के दर्शन करने के नियम 

अगर आप मेहंदी पुर बालाजी के दर्शन करने आ रहे है तो आपको कुछ सख्त नियमों का पालन करना पड़ेगा जो की जानने आवशयक हैं। 

1. अगर आप मेहंदी पुर बालाजी के दर्शन करने आ रहे है तो दर्शन से 7 दिन पहले और 41 दिन तक आपको माँसाहारी और तामसी पदार्थों का सेवन बंद करना होगा। 

2. मेहंदी पुर बालाजी के मंदिर में चढ़ाने को लिया गया प्रसाद ना तो किसी को दे न किसी से ले। 

3.  मेहंदी पुर बालाजी मंदिर से कोई खाने पिने की चीज़, न कोई प्रसाद अपने घर  लेकर जाए। 

4. मंदिर परिसर में या रास्ते में पड़े सिक्के या कोई भी चीज़ नहीं उठाये। 

5. मंदिर परिसर में पीछे पलट कर नहीं देखे। 

6. यहाँ पर आपको लोग अजीबो हरकतें करते दिख सकते है तो आप उनकों देखकर हसे नहीं। 

ये सब इसलिए है क्योंकि यहाँ पर काफी लोग नकारात्मक ऊर्जा से ग्रस्त होते है। इसलिए इनसे बचाव के लिए ऐसा करना सही रहता हैं। 


मेहंदी पुर बालाजी मंदिर के दर्शन करने आने का सही समय  

अगर आप मेहंदी पुर बालाजी मंदिर के दर्शन करने आने वाले है तो भीड़ वाले दिन और सीजन वाले दिन आने से बचे। आपको बता दे की दशहरा,होल, दिवाली और हनुमान जयंती  के अवसर पर मंदिर आने से बचे। क्योंकि इन अवसरों  जबरदस्त भीड़ रहती हैं। इसके अलावा सप्ताह के दिन मंगलवार और शनिवार को मंदिर बचे। क्योंकि ये दिन हनुमान जी के है तो यहाँ पर काफी भीड़ रहती हैं। इसलिए आप मंदिर दर्शन के लिए मंगलवार और शनिवार को छोड़कर बाकी दिनों में आ सकते हैं। वैसे मंदिर आने का उपयुक्त समय सर्दियों का रहता है क्योकि उस समय आप गर्मी से बच सकते हैं। 


मेहंदी पुर बालाजी मंदिर तक कैसे पहुँचे 

दौसा जिले सिकराय तहसील में स्थित मेहंदी पुर बालाजी के मंदिर तक आप सड़क और रेल मार्ग  आसानी से पहुंच सकते हैं। 

बस द्वारा - क्योंकि मेहंदी पुर बालाजी जयपुर-आगरा हाईवे से मात्र 3 किलोमीटर दूर है तो यह पर बस की सुविधा 24 घंटे रहती हैं। मेहंदी पुर बालाजी दौसा से 49 KM और जयपुर से  110 KM दूरी पर हैं। बालाजी  मंदिर हाईवे के पास होने की वजह से जयपुर या आगरा जाने वाली बसे इधर से हो कर ही गुजरती हैं। आप अगर बस से आते हो हो हाईवे पर बालाजी मोड़ उतरकर मंदिर हो। बालाजी मोड़ से मंदिर मात्र 3 किलोमीटर दूरी पर हैं। सिकंदरा और बांदीकुई से आपको मेहंदी पुर बालाजी  टैक्सी, जीप और बसे मिलती रहती हैं। 

ट्रैन द्वारा - अगर आप ट्रैन से मेहंदी पुर बालाजी  आना चाहते है तो आपको सबसे नजदीक बांदीकुई रेलवे स्टेशन उतरना पड़ेगा। बांदीकुई जंक्शन से मेहंदी पुर बालाजी मंदिर मात्र 34 किलोमीटर दूर हैं। यहाँ से आपको बालाजी  मंदिर के लिए टैक्सी, जीप, बसे आसानी से मिलती रहेगी। अगर आप जयपुर से ट्रैन से  आते हो तो आपको बांदीकुई जंक्शन उतरना पड़ेगा। जयपुर जंक्शन से बांदीकुई रेलवे स्टेशन मात्र 92 किलोमीटर दूर है। इस रूट पर आपको अनेको ट्रेन मिलती रहती हैं। 

हवाई मार्ग - अगर आप प्लेन द्वार मेहंदी पुर बालाजी आने की सोच रहे हो तो आपको जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरना होगा। यहाँ से आप टैक्सी, बस या खुद की गाड़ी से बालाजी मंदिर आ सकते हो। 


मेहंदी पुर बालाजी मंदिर के आस-पास देखने लायक जगह 

चाँद बावड़ी (आभानेरी) - मेहंदी पुर बालाजी मंदिर के बाद आप चाँद बावड़ी भी घूम सकते हो। यह बावड़ी बाँदीकुई के आभानेरी गाँव में स्थित हैं। यह बावड़ी बालाजी मंदिर से मात्र 25 किलोमीटर दूर स्थित है।  

भानगढ़ किला - मेहंदी पुर बालाजी मंदिर देखने के बाद आप भानगढ़ किले पर भी घूमने जा सकते हो। यह किला अलवर जिले में पड़ता है जो की बालाजी मंदिर से 78 KM स्थित हैं।

अंजना माता मंदिर - बालाजी मंदिर से 1-1.5 किलोमीटर दूरी पर स्थित यह मंदिर अंजना माता मंदिर के नाम से जाना हैं। यह बहुत ही खूबसूरत मंदिर हैं। 

इसके अलावा आप दौसा शहर में  मंदिरों में घुम सकते हो। आप जयपुर शहर में भी हवा महल, जंतर-मंतर, आमेर किला, जल महल आदि देख सकते हो।  



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