चाँद बावड़ी (आभानेरी): भारत की सबसे बड़ी बावड़ी
चाँद बावड़ी भारत की सबसे खूबसूरत पुरानी पानी की बनावटों में से एक है, जो राजस्थान के सूखे इलाकों में पुराने ज़माने की इंजीनियरिंग का सबूत है। आभानेरी गाँव में मौजूद यह बावड़ी शानदार बनावट और इंजीनियरिंग की काबिलियत का मेल है। चाँद बावड़ी की बनावट इसकी खूबसूरती को दिखाती है जो की साल भर में हजारों लोगो को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इसकी खूबसूरती की वजह से वजह से ही यह बावड़ी कई डॉक्यूमेंट्री और फिल्मों की शूटिंग की साक्षी रही हैं। साल 1955 में इस बावड़ी को सरकार ने अपने संरक्षण में ले लिया। वर्तमान समय में चाँद बावड़ी (आभानेरी ) भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में हैं।
किसने बनवाया - राजा चंदानिर्माण - 8वी-9वी शताब्दीकहाँ स्थित - आभानेरी बाँदीकुई, दौसाघूमने के लिए उचित समय - मानसून के बाद (सितम्बर - मार्च)एंट्री फीस - Rs. 20/- भारतीय नागरिकRs. 250/- विदेशी नागरिकसमय - सुबह 8 - शाम 5 बजे तककैसे पहुँचे - बस द्वारा 35 km ( दौसा बस स्टैंड )बाँदीकुई रेलवे स्टेशन ( 6.5 km )किसके अंतर्गत - भारतीय पुरातत्व विभाग ( ASI )आस-पास घूमने लायक जगह - भानगढ़ किला,सरिस्का टाइगर रिज़र्व,नीलकंठ महादेव मंदिर,कांकवाड़ी किला,सिलीसेढ़ झील,बाला क़िला,हर्षत माता मंदिर।
चाँद बावड़ी (आभानेरी) का इतिहास और बनावट
आठवीं शताब्दी में बनाई गई चाँद बावड़ी भारत के इतिहास में अपना एक अलग ही स्थान रखती हैं। यह बावड़ी भारत की सबसे बड़ी बावड़ी हैं। दौसा जिले के आभानेरी गाँव स्थित यह बावड़ी जिसको राजा चंदा ने आठवीं-नौवीं शताब्दी में आस-पास के इलाकों में पानी की कमी की पूर्ति के लिए बनवाया था। इसकी बनावट इतनी अदभुत है की इसे देखने देशी लोगो के साथ विदेशी लोग भी भरपुर आते हैं। चाँद बावड़ी के पास ही हर्षत माता का मंदिर भी जिसको इससे पहले का बना हुआ माना जाता हैं। आभानेरी बावड़ी का इतिहास भी तोड़ फोड़ से जुड़ा हुआ हैं। महमूद गजनी ने भारत आक्रमण के दौरान इस बावड़ी पर तोड़ फोड़ की थी और काफी नुकसान पहुंचाया था। आज भी चाँद बावड़ी के कई खंभे, कॉलम क्षतिग्रस्त है। बाद में मुग़ल काल के दौरान भी मुगलों ने इस बावड़ी पर मंदिरो में तोड़ फोड की थी। पुराने समय में चाँद बावड़ी लोगो की प्यास बुझाने साथ-साथ धार्मिक कार्यो में भी बहुत उपयोगी थी। तीर्थयात्री जब लंबी यात्रा करके आते थे इसी बावड़ी की सीढ़ियों पर बैठकर प्यास बुझाते और छाव में आराम करते।
चाँद बावड़ी की बनावट की बात करे तो यह 13 मंजिली एक पिरामिड आकर की संरचना हैं। स्थनीय भाषा में कहे तो चांद बावड़ी एक गहरा चार-तरफा कुआं है जिसके पीछे एक बड़ा मंदिर है। इस बावड़ी में तीन तरफ कुल 3500 सीढिया है और चौथी तरफ कई स्तरों पर खंभों वाले गलियारे हैं। यह बावड़ी लगभग 30 मीटर (100 फ़ीट) गहरी है जिसकी सीढिया निचे 30x20 मीटर के पानी के टैंक की तरफ जाती हैं। स्थानीय पत्थरों से बनी, बावड़ी एक उल्टा पिरामिड जैसी संरचना बनाती है जिसके सीढ़ियों में बीच बीच में आले बने हुए हैं। इन आलो में पुराने समय में दीपक या फिर मूर्तियाँ रखी जाती थी। इस बावड़ी की इंजीनियरिंग इतनी शानदार है की इसके पत्थरों पर की गई नक्काशी धुप में हीरे जैसी चमकती हैं।
आभानेरी चाँद बावड़ी के बारे में किंवदंतियां और रहस्य
सबसे प्रचलित किंवदंतियां तो आभानेरी बावड़ी के निर्माण को लेकर है। कहा जाता है की इस बावड़ी का निर्माण जिन्नों द्वारा एक ही रात में किया गया था। क्योंकि 3500 सीढ़ियों वाली विशालकाय बावड़ी का इतने सटीक तरीके से निर्माण इंसानों द्वारा संभव नहीं हैं।
दूसरा इस बावड़ी को अँधेरे-उजाले की बावड़ी के नाम से भी जाना जाता हैं। क्योंकि इस बावड़ी की नक्काशी इस तरह से की गई है की चाँदनी रात में यह बावड़ी पूरी तरह दूध की तरह सफ़ेद और चमकती हुए दिखाई पड़ती हैं।
तीसरा स्थनीय लोगों द्वारा बावड़ी के अंदर 17 किलोमीटर लम्बी सुरंग बताई जाती है जिसका उपयोग राजा युध्द के समय अपने बचाव के लिए करता था। कहते है यह सुरंग पास में भांडारेज गाँव में जाके निकलती हैं।
चौथा बावड़ी की भुल-भुलैया रूपी संरचना। इस बावड़ी का निर्माण 13 मंजिली एक उलटे पिरामिड रूपी आकृति में किया किया गया है। जिसमे 3500 से भी जयदा सीढ़िया बानी हुए हैं। इस बावड़ी की जिस सीढ़ी से होकर आप निचे उतरते हो उस सीढ़ी से होकर आप वापस ऊपर नहीं आ सकते। इसलिए इस बावड़ी को भूलभुलैया भी कहते हैं।
चाँद बावड़ी में कैसे घूमे
चाँद बावड़ी आभानेरी में घूमने के लिए आपको सबसे पहले एंट्री टिकट लेना होगा। फिर आप बावड़ी परिसर में आके इसकी सुंदरता को निहारना। बावड़ी में बनी सीढ़ियों का निचे उतरना और एक दूसरे से मिलना आपका ध्यान पूरी तरह आकर्षित करेगी। पर्यटकों को बावड़ी में निचे उतरने की इजाजत नहीं है। बावड़ी के चारों तरफ सुरक्षा द्रष्टिकोण से घेराबंदी की गई हैं। बावड़ी के पास हर्षत माता का मंदिर है जो की 9वी सदी में बनवाया गया था।
चाँद बावड़ी (आभानेरी ) कैसे पहुँचे
चाँद बावड़ी दौसा जिले में बाँदीकुई तहसील के आभानेरी गॉँव में स्थित हैं। यहाँ तक पहुँचने के लिए आप दौसा से बस मार्ग और रेल मार्ग द्वारा आ सकते हैं। दौसा रेलवे स्टेशन से यह बावड़ी मात्र 35 किलोमीटर दूर पड़ती हैं। चाँद बावड़ी के सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन बाँदीकुई रेलवे स्टेशन है जो मात्र 6.5 किलोमीटर दूरी पर स्थित हैं। चाँद बावड़ी जयपुर से 94 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जयपुर से आभानेरी पहुँचने तक आप सड़क मार्ग और रेल मार्ग दोनों से आ सकते हैं। जयपुर से सड़क मार्ग द्वार आप सिकंदरा पहुँचे वहाँ से बाईं हाथ की तरफ बाँदीकुई मार्ग पर 9.8 किलोमीटर दूरी चलकर यहाँ पहुँचा जा सकता हैं।
चाँद बावड़ी (आभानेरी ) घूमने आने का सही समय
राजस्थान से मौसम के हिसाब से चाँद बावड़ी (आभानेरी ) आने का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च तक का हैं। मानसून के बाद सर्दी समय में आप आराम से यहाँ घुमा सकते हैं। चाँद बावड़ी (आभानेरी ) के लिए भारतीय नागरिक को Rs. 20/- प्रति व्यक्ति और विदेशी नागरिक को Rs . 250/- प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क देना होता हैं। अगर आप आभानेरी घूमने है अपने पास पर्याप्त कैश लेके आये ताकि नेटवर्क की दिक्कत होने पर आपको कोई दिक्कत नहीं हो।
चाँद बावड़ी (आभानेरी ) के आस पास घूमने लायक स्थान
मेहँदी पुर बालाजी - चाँद बावड़ी से मात्र 24 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर मेहँदी पुर बालाजी के नाम से जाना जाता हैं। इसमें हनुमान जी की मूर्ति है और यह मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध हैं। यह तक पहुँचने के लिए सिकंदरा से 24 घंटे आपको बस, टैक्सी और जीप मिलती रहती है। जयपुर या महुआ की तरफ जाने वाली हर बस टैक्सी बालाजी मोड़ से होकर ही गुजरती हैं।
हर्षत माता मंदिर - चाँद बावड़ी के पास ही 9वी शताब्दी में निर्मित यह मंदिर है जो की अपने पत्थर की नक्काशी को लेकर प्रचलित हैं।
भानगढ़ किला - अलवर जिले के राजगढ़ तहसील में स्थित यह किला देखने लायक हैं। इस किले को भूतिया किला भी हैं। भानगढ़ किला चाँद बावड़ी आभानेरी से मात्र 48 किलोमीटर दूर हैं। भानगढ़ किले के लिए आप बस द्वारा जा सकते हैं।
दौसा शहर - चाँद बावड़ी से मात्र 35 किलोमीटर दूरी पर स्थित दौसा में आप यहाँ के लोकल मार्किट और किले देख सकते हैं।
जयपुर शहर - चाँद बावड़ी से मात्र 94 किलोमीटर दूर स्थित जयपुर शहर देखने लायक जगह हैं। अपने आप में गुलाबी नगरी कहे जाने वाले शहर में आमेर किला, जल महल, हवा महल, जंतर-मंतर, सिटी पैलेस और नाहरगढ़ फोर्ट जैसी जगह देखने लायक हैं।
