कालीबंगा पुरातत्व संग्रहालय: हड़प्पा संस्कृति का संग्रह

कालीबंगा पुरातत्व संग्रहालयहडप्पा की खुदाई के दौरान मिली वस्तुओं का संग्रह

kalibanga museum hanumangarh



भारत की प्राचीन सभ्यता में से एक हड़प्पा सभ्यता में खुदाई के दौरान अनेकों वस्तुएँ और हथियार मिले जिनको आज कालीबंगा म्यूजियम में रखे गए हैं। साल 1985 में स्थापित इस संग्रहालय में पत्थरों की वस्तुएँ, ईंट, मिटटी के बर्तन आदि लोगो के लिए सजोये हुए हैं। कालीबंगा संग्रहालय का एकमात्र उद्देश्य हडप्पा की खुदाई के दौरान मिली वस्तुओं को पर्यटकों के लिए प्रदर्शित करना हैं। वर्तमान समय में कालीबंगा संग्रहालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में आता हैं। हड़प्पा की खुदाई की बात करे तो यह साल 1961 से 1969 के बीच नौ चरणों में चली। यह संग्रहालय पीलीबंगा तहसील मुख्यालय से मात्र 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित हैं। अगर आप कालीबंगा संग्रहालय घूमने का प्लान बना रहे है तो इस ब्लॉग में हम आपको वह तक पहुँचने से लेकर वह कैसे घूमना है सारी जानकारी बतायेगे। 

स्थापना  - साल 1985 

क्यों प्रसिध्द - हड़प्पा सभ्यता की वस्तुओं को प्रदर्शित किया हुआ हैं। 

खास - सबसे पुराने जुते खेत, अग्नि वेदिकाए, मानव आकृतियाँ आदि 

किसके संरक्षण में - भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)

खुलने का समय - रोज सुबह 9 बजे से 5 बजे तक 

                            (शुक्रवार को बंद रहता हैं। )

एंट्री फीस - Rs. 5 /- प्रति व्यक्ति 

कहाँ स्थित - राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में 

कैसे पहुँचे - बस, ट्रैन और प्लेन द्वारा 

आस-पास  - भटनेर किला, पुरातात्विक स्थल, घग्घर नदी, 

                     गोगामेड़ी मंदिर और भद्रकाली मंदिर। 


कालीबंगा संग्रहालय की स्थापना 

कालीबंगा संग्रहालय की स्थापना साल 1985 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की गई थीं। इस संग्रहालय की स्थापना का मुख्या उद्देश्य हड़प्पा सभ्यता में मिली वस्तुओं का प्रदर्शन करना था। जब साल 1961 से 1969 के बीच प्रो. बी. बी. लाल, श्री बी. के. थापर और श्री जे. पी. जोशी के सानिध्य में हड़प्पा की खुदाई हुई थी, उस दौरान निकली वस्तुएँ को आज इसी संग्रहालय में रखा गया हैं। 18 मई 2017 को अपग्रेडेशन और पुनर्गठन के बाद कालीबंगा संग्रहालय को वापस खोला गया। 

कालीबंगा संग्रहालय में क्या देखें  

कालीबंगा संग्रहालय में हड़प्पा सभ्यता में निकली दुर्लभ वस्तुओं को तीन गैलेरी में रखा गया। इसमें घूमने पर आपको तीनों गैलरी में अलग-अलग प्रकार की दुर्गम वस्तुएँ दिखेंगी। 

इन गैलरी में हड़प्पाकालीन और पूर्व हड़प्पा वस्तुओं का संग्रह किया गया हैं। 

प्रथम गैलरी - इस गैलरी में हड़प्पा सभ्यता में मिली प्रारंभिक हड़प्पा की मिट्ठी की वस्तुएँ दर्शायी गई हैं। इसने टेराकोटा, खेल की मोहरें, जानवरों के आकृति, मानव आकृतियाँ और पक्षियों की आकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं। इस गैलरी में प्रारंभिक हड़प्पा में पत्थरों से बनी वस्तुएँ भी प्रदर्शित हैं। 

द्वितीय गैलरीइस गैलरी में आपको परिपक्व हड़प्पा चरण की वस्तुएं और सामग्री देखने को मिलेंगी। इस गैलरी में विभिन्न प्रकार की आकृतियाँ और हड़प्पाकालीन अक्षर प्रदर्शित किये गए हैं। इस गैलरी के केंद्र में एक बड़ा मिठ्ठी संग्रहण का जार प्रदर्शित है जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। 

तृतीय गैलरी - इस गैलरी में आपको परिपक़्व हड़प्पा की वस्तुएँ देखने मिलेगी। इस गैलरी में आपको धातु की वस्तुएँ, आभूषण और तांबे की वस्तुएँ देखने को मिलेगी। इसके अतिरिक्त इस गैलरी में आपको ब्लेड, चाकू, भाले, महिलाओं के फैशन की वस्तुएँ आदि प्रदर्शित की गई हैं। 

 यहाँ पर आप विश्व का सबसे पुराना जुता हुआ खेत देख सकते हैं। 

 

कालीबंगा संग्रहालय की एंट्री फीस और नियम 

कालीबंगा संग्रहालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में आता हैं। इस म्यूजियम में भारतीय और विदेशी नागरिकों के लिए एंट्री फीस समान हैं। कालीबंगा संग्रहालय  में प्रवेश के लिए आपको Rs. 5/- प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क देना पड़ता हैं। अगर आप यह टिकट ऑनलाइन बनाते हो तो ASIPAYUMONEY पर जाकर बना सकते हो। 

  • 15 वर्ष या उससे कम आयु के बच्चे निःशुल्क हैं। 
  • सूर्यास्त के बाद प्रवेश नहीं। 
  • संग्रहालय के अंदर शूटिंग बिना अनुमति के नहीं होगी। 

 

कालीबंगा संग्रहालय घूमने आने का समय 

कालीबंगा संग्रहालय राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में पड़ता है। अगर आप कालीबंगा संग्रहालय को देखने आने की योजना बना रहे है तो आपके लिए सही मौसम अक्टूबर से मार्च के बीच का रहेगा। क्योंकि इस दौरान आपको राजस्थान की गर्मी महसूस नहीं होगी। 

कालीबंगा संग्रहालय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता हैं। यह संग्रहालय शुक्रवार के दिन बंद रहता हैं। 

 

कालीबंगा संग्रहालय कैसे पहुँचे 

कालीबंगा संग्रहालय पहुँचने के लिए आप बस, ट्रेन या टैक्सी किसी भी मार्ग का उपयोग कर हैं। 

अगर आप बस द्वारा आना चाहते हो तो पीलीबंगा बस स्टैंड उतर सकते हो। यहाँ आप रिक्शा या टैक्सी द्वारा कालीबंगा म्यूजियम पहुँच सकते हो। 

अगर आप ट्रेन से कालीबंगा आना चाहते हो तो आपको निकटतम रेलवे स्टेशन हनुमानगढ़ जंक्शन उतर हो। यहाँ से आप टैक्सी स्थानीय बसों द्वारा कालीबंगा पहुँच सकते हो। 

अगर आप प्लेन द्वारा कालीबंगा संग्रहालय पहुँचना चाहते हो तो सबसे नजदीक हवाई अड्डा साहनेवाल हवाई अड्डा (लुधियाना) है। आप बीकानेर हवाई अड्डे से भी यहाँ सकते हो। 

 

कालीबंगा संग्रहालय के आस-पास घूमने लायक जगह 

भटनेर किला - कालीबंगा संग्रहालय से मात्र 30 दूरी पर स्थित यह किला देखने लायक हैं। 1700 सालों से पुराना यह किला पूरी तरह ईंटों  बना हुआ हैं। 

पुरातात्विक स्थल - कालीबंगा संग्रहालय पास में ही हड़प्पा की खुदाई के स्थल हैं। यहाँ पर आप विश्व का सबसे पुराना जुता हुआ खेत और अग्नि वेदिया देख सकते हो। 

गोगामेड़ी मंदिर - अगर आप कालीबंगा घूमने गए हो तो हनुमानगढ़ में बना गोगामेड़ी मंदिर देखना भूले। 

घग्घर नदी - आप हनुमानगढ़ शहर और घग्घर नदी के किनारे पर भी घूम सकते हो। 

भद्रकाली मंदिर - हनुमानगढ़ के पास ही भद्रकाली का मंदिर बना हुआ है जहाँ आप घूमने जा सकते हो।  

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