भटनेर किला: भारत के सबसे पुराने ईंट के किला और उत्तर का प्रहरी

भटनेर किला: उत्तर का प्रहरी  

भटनेर किला: उत्तर का प्रहरी


किलों का गढ़ कहे जाने वाला भटनेर किला राजस्थान के सबसे पुराने किलों में से एक है। यह पूरी तरह से ईंटों से बना है, जो इसे अनोखा बनाता है। भटनेर किला राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में है। कहा जाता है कि यह लगभग 1,700 साल पुराना है। पैरेललोग्राम के आकार में बना यह किला लगभग 52 बीघा एरिया में फैला है। 1985 में, इस किले को भारतीय पुरातत्व विभाग ( ASI ) द्वारा राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में घोषित किया था। इसमें किले के अलावा कालीबंगा म्यूजियम भी है जिसमे सिंधु घाटी सभ्यता  सम्बंधित वस्तुए देखने के लिए रखे हैं। 

महत्वपूर्ण बिंदु :-

किसने बनवाया - किंग भूपत ( राव भाटी का पुत्र )

निर्माण - 295 A.D.

कहाँ स्थित - राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में 

घूमने के लिए उचित समय - सितम्बर - मार्च 

एंट्री फीस - टिकट नहीं लगता।

समय - सुबह 9 - शाम 5 बजे तक

कैसे पहुँचे - हनुमानगढ़ रेलवे स्टेशन ( 6 K.M दुरी पर )

किसके अंतर्गत - भारतीय पुरातत्व विभाग ( ASI ) 

आस-पास घूमने लायक जगह - कालीबंगा म्यूजियम 


 भटनेर किले का इतिहास और बनावट 

भटनेर किला राव भाटी के बेटे किंग भूपत ने बनवाया था। इस किले का निर्माण किंग भूपत ने अपने पिता की याद में 295 ईस्वी में बनवाया था। पहले हनुमानगढ़ को भटनेर के नाम से भी जाना जाता था जिसका मतलब भाटियों का किला होता हैं। भटनेर दुर्ग को बनने में लगभग 30 साल का समय लगा था। 14वी शताब्दी से लेकर 19वी शताब्दी तक किले पर अनेकों लोगों का शासन रहा जिसमे तैमूर का आक्रमण मुख्य था। जब भटनेर किले को बिकानेर के राजा सूरत सिंह ने 1805 में अपने अधिकार में लिया था तब से लेकर राजस्थान के गठन ( 1949 तक ) यह किला इन्ही के पास रहा था। बाद में जाके इसका नाम भटनेर से बदलकर हनुमानगढ़ पड़ा। आज यह किला राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरेख में हैं। किले की बनावट की बात करे तो भटनेर किला समान्तर चतुर्भुज के आकर का बना हुआ है जो की 52 बीघा में फैला हुआ हैं। 1700 सालों से अपने 52 बुर्जों पर टिका यह किला पूरी तरह ईंटों से बना हुआ हैं। पहले इसे "उत्तर के ताकतवर दरवाज़े" का टाइटल प्राप्त था क्योंकि मध्य एशिया के आक्रमण कारियो से बचाव की यह एक अहम कड़ी थी। 


भटनेर दुर्ग पर किस-किस का शासन रहा 

साल 295 से लेकर 1805 ईस्वी तक किले पर काफी शासकों ने शासन किया इनमें से तैमूर की घेराबंदी प्रमुख हैं।  1101 ईस्वी के आस पास किले पर अलग अलग समयांतराल में महमूद गजनवी, कुतुबुद्दीन ऐबक और अकबर जैसे शासकों ने शासन किया। तैमूर ने 1398 में जब भारत पर आक्रमण किया था तब मध्य एशिया में अपना बहुत बढ़ा साम्राज्य स्थापित किया। जिसमे से केवल भटनेर के भाटी शासक राय दुल चंद से कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। तैमूर के आक्रमण से पहले भटनेर पर भाटी शासक राय दुल चंद का शासन था। तैमूर के खिलाप उस समय राजपूतों ने लड़ाई लड़ी लेकिन किले पर कब्ज़ा होने से नहीं रोक पाए। तलवारा झील तैमूर के भटनेर दुर्ग पर आक्रमण दौरान डेरा डालने के कारण ही प्रसिद्ध हुई थीं। बाद में 1527 में बीकानेर राज्य के राव जेट सिंह ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था। 1805 ईस्वी में यह किला बीकानेर के  सूरत सिंह के कब्जे में रहा। उसके बाद राजस्थान गठन के दौरान किले को राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में घोषित कर दिया गया।  

भटनेर दुर्ग के रोचक तथ्य 

भटनेर दुर्ग भारत के सबसे पुराने बचे हुए किले में से है। इसमें सबसे अदभुत चीज़ यह है की यह किला जैसलमेर के सुनहरे बलुआ पत्थर के पहाड़ी किलों या उदयपुर के संगमरमर के महलों के उलट, भटनेर एक मज़बूत, काम का अजूबा है जो पूरी तरह से भट्टी में पकी ईंटों से बना है। 

दूसरा इस किले के चारो और बावन बुर्ज।  इसके घेरे की सुरक्षा 52 गोल बुर्जों से होती है, हर तरफ बारह, जिससे समतल रेगिस्तानी मैदानों पर 360-डिग्री का सुरक्षा वाला नज़ारा देते थे। 

तीसरा किले में पानी का मैनेजमेंट पानी।  लंबी घेराबंदी झेलने के लिए, किले की नींव में बारिश का पानी जमा करने के लिए 52 कुंड (ज़लाशय) थे, जो पूरे एक साल तक एक बड़ी बटालियन को संभाल सकते थे।

चौथा बाहरी आक्रमणकारियों के लिए उत्तर के ताकतवर दरवाज़े। भटनेर दुर्ग के दिल्ली-मुल्तान व्यापर मार्ग पर अवस्थित होने से इसने मध्य एशियाई हमलावरों के खिलाफ़ बचाव की पहली लाइन बना दिया। इसी वजह से इसके शासकों को "उत्तर के ताकतवर दरवाज़े" का टाइटल मिला।

पाँचवा भटनेर से हनुमानगढ़ नाम परिवर्तन। 1805 ईस्वी में जब बीकानेर के महाराजा सूरत सिंह ने भाटी राजपूतों से कई भयंकर लड़ाइयों के बाद  किला जीत लिया था। क्योंकि जिस दिन महाराजा सूरत सिंह ने यह किला फतह किया था उस दिन मंगलवार था जो की हनुमान जी को समर्पित दिन है इसलिए सूरत सिंह ने बाकी शहर का नाम हनुमानगढ़ रख दिया। 

छठवाँ शेर खान की कब्र।  किले के अंदर शेर खान की कब्र है, जो दिल्ली के सुल्तान बलबन (13वीं सदी) के चचेरे भाई थे, जो इस इलाके के गवर्नर थे और उन्हें किले के खंभों की मरम्मत का क्रेडिट दिया जाता है।


भटनेर दुर्ग में देखने लायक चीज़े 

भटनेर दुर्ग खुद पूरा देखने लायक हैं क्योंकि ईंटों से बना यह किला खूबसूरत दिखता हैं। किले के अंदर अलग अलग धर्मों के मंदिर और मक़बरे बने हुए हैं। किले के अंदर हिंदू और जैन के धर्म के मंदिर है जिनमे भगवान शिव और कई जैन तीर्थंकरों को समर्पित पुराने मंदिर हैं। भटनेर दुर्ग के अंदर ही शेर खान की कब्र बानी हुई हैं। 

भटनेर दुर्ग के आस पास घूमने लायक जगह 

भटनेर दुर्ग के पास कालीबंगा म्यूजियम जिसमे सिंधु सभ्यता के अवशेष रखे हुए हैं। यह म्यूजियम भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण हैं। म्यूजियम सुबह 10:00 AM से 5:00 PM तक चालू रहता है जिसका प्रवेश शुल्क Rs. 5/- प्रति व्यक्ति हैं। किले के बाहर गोगामेरी मंदिर बना हुआ हैं। 

भटनेर दुर्ग पर घूमने आने का सही समय 

राजस्थान के वातावरण को देखते हुए अगर आप भटनेर दुर्ग देखने आते हो तो सबसे उपयुक्त समय सितम्बर से मार्च के बीच रहता हैं। क्योकि इस समय पर तापमान नहीं रहता है। इसके अलावा आप बरसात के मौसम में भी भटनेर दुर्ग देखने आ सकते हैं। अगर आप हनुमानगढ़ आये तो भटनेर दुर्ग के साथ साथ कालीबंगा म्यूजियम भी अवश्य देखकर जाए। 


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!