केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य: कैसे घूमे, सफारी शुल्क और क्या-क्या देखें

 केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य: भरतपुर का पंखों वाला स्वर्ग

keoladeo-national-park-bharatpur


राजस्थान की शुष्क भूमि पर केवलादेव राष्ट्रिय उद्यान एक ऐसा पक्षी अभयारण्य है जहाँ पर आपको एक उड़ता हुआ स्वर्ग देखने को मिलेगा। राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित यह अभयारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए जाना जाता हैं। यह अभयारण्य पक्षियों के लिए स्वर्ग कहा जाता है क्योंकि यहाँ पर पक्षी मौंसम परिवर्तन के साथ प्रजनन और गर्मी से बचने के लिए आते हैं। केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य की जैव-विविधता देखकर इसको वर्तमान समय में UNESCO की सूचि में शामिल किया गया हैं। अगर आप यूनेस्कों के इस विश्व धरोहर स्थल में घुमनें आने का प्लान बना रहे हो तो आप सही आर्टिकल पढ़ रहे हों। इस ब्लॉग में हम आपको केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य के बारें में संपूर्ण जानकारी देंगे। 


स्थापना - 1971 में अभयारण्य 
                1982 में राष्ट्रिय उद्यान 
                1985 में विश्व धरोहर स्थल
क्षेत्रफल - 29 वर्ग किलोमीटर 
कहाँ स्थित - राजस्थान के भरतपुर जिले में 
घुमनें आने का सही समय - अक्टूबर से मार्च के बीच 
कैसे घूमें - पैदल, साइकिल या रिक्शा 
प्रवेश शुल्क - ₹145 ( भारतीय नागरिक )
                      ₹915 ( विदेशी नागरिक )
                       ₹55 (भारतीय स्टूडेंट )
विडियो कैमरा शुल्क - ₹890 (भारतीय नागरिक )
                                   ₹1320 (विदेशी नागरिक )
कैसे पहुँचे - बस द्वारा (भरतपुर बस स्टैंड )
                    ट्रेन द्वारा (भरतपुर जंक्शन )
क्या-क्या देखें - इंडियन कोर्ज़र, इंपीरियल ईगल, डेमॉइसेल क्रेन, 
                          ब्लैकहेडेड आइबिस,ओरिएंटल डार्टर, नॉर्दर्न शोवेलर, 
                          डेलमेटियन पेलिकन, ब्लैक बिटरन, ग्रेटर पेंटेड स्नाइप, 
                          डस्की ईगल आउल, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल, यूरेशियन स्पूनबिल, 
                          लग्गर फाल्कन, पैलास ईगल; इंडियन रॉक पाइथन, 
                          रसेल वाइपर, कॉमन क्रेट, कॉमन वुल्फ स्नेक, चेकरड कीलबैक
आस-पास - लोहागढ़ फोर्ट, डीग फोर्ट, डीग भवन 

केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य कि स्थापना

केवलादेव राष्ट्रिय उद्यान राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित है। साल 1971 में इसकी स्थापना अभयारण्य  की गई। शुरुआत में इसे भरतपुर के राजाओं द्वारा बतख शिकार के तालाब के रूप में स्थापित किया था। साल 1982 में इसे राष्ट्रिय उद्यान का दर्जा प्राप्त हुआ था।  3 साल बाद साल 1985 में केवलादेव राष्ट्रिय उद्यान को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल की सूचि में शामिल किया। 

29 वर्ग किलोमीटर में फैला केवलादेव राष्ट्रिय उद्यान 370 से भी अधिक प्रजाति के पक्षियों का निवास स्थान हैं। 11 मील (29 वर्ग किमी) में फैला यहाँ राष्ट्रिय उद्यान स्थानीय क्षेत्रों में घना के नाम से जाना जाता हैं। 


केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य में क्या-क्या देखें 

प्रवासी पक्षी - केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य में आप दुर्लभ विलुप्त प्रजाति के पक्षियों को देख सकते हो। जिसमें बार-हेडेड-कलहंस, डालमेशियन पेलिकन, पेंटेड स्टॉर्क, सारस क्रेन और ओरिएंटल डार्टर शामिल हैं। साइबेरियन सारस जो की एक विलुप्त प्रजाति है केवलादेव राष्ट्रिय उद्यान में आख़िरी बार 2002 में देखा गया था। 
पाइथन पॉइंट - केवलादेव राष्ट्रिय उद्यान में अजान बांध के पास इंडियन रॉक पाइथन पाए जाते है जो की पार्क में घुमनें का मुख्य आकर्षण हैं। यहाँ पर आपको 150 से अधिक अजगर देखने को मिलेंगे। पाइथन पॉइंट पर आपको 15-25 फ़ीट के अजगर धुप सेंकते नजर आएंगे। 
साइकिल और रिक्शा सफारी - केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में आप घुमनें जा रहे है तो पक्षी भ्रमण के लिए आप साइकिल या रिक्शा किराये पर ले सकते हैं। ये आपको प्रवेश द्वार पर ही  ₹20-₹40 में मिल जाएंगे। इनमें रिक्शा चालक प्रक्षिशित होते है जो आपको गाइड करते चलेंगे। ये रिक्शे आपको सुबह से लेकर शाम तक उपलब्ध रहते हैं। 
बोट सफारी - केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य के वेटलैंड क्षेत्र में नाव सफारी का आंनद ले सकते हैं। नाव सफारी से आप पार्क की झीलों में रहने वाले प्रवासी पक्षी आराम से देख सकते हैं। 
केवलादेव मंदिर - पार्क के बीचों-बीच भगवान शिव का मंदिर है जिसे केवलादेव मन्दिर के नाम से जाना जाता हैं। इसी मंदिर के नाम पर ही इस पार्क का नाम केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान रखा गया। इससे पहले इस पार्क को भरतपुर पक्षी अभयारण्य के नाम से जाना जाता था। 

केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य घुमनें आने का सही समय 

केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य में घूमने आने का सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच का रहता हैं। इस समय के बीच आपको यहाँ अनेकों प्रवासी पक्षी देखने को मिलेंगे जिनमे साइबेरियन सारस, पेलिकन, ईगल आदि शामिल हैं। केवलादेव उद्यान में सुबह 6 से 9 बजे तथा शाम को 4 से 6 बजे तक पक्षियों की हलचल अधिक देखने को मिलती हैं। इस समय में आप गर्मी से बच सकते हो। 

केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य में जंगल सफारी शुल्क, समय 

केवलादेव पक्षी अभयारण्य जो की 350 से भी अधिक प्रजातियों के पक्षीयों का आश्रय हैं। केवलादेव राष्ट्रिय उद्यान में भारतीय नागरिकों के लिए प्रवेश शुल्क ₹145 और विदेशी नागरिकों ₹ 915 हैं। यहाँ पर 5 वर्ष से काम आयु के बच्चे निःशुल्क हैं। भारतीय स्टूडेंट के लिए प्रवेश शुल्क ₹55 हैं। केवलादेव पक्षी अभयारण्य सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता हैं। 
केवलादेव पक्षी अभयारण्य में अगर आप वीडियो कैमरा लेकर जाते हो तो ₹890 (भारतीय नागरिक ) और ₹1320 (विदेशी नागरिक ) शुल्क देय होगा। 

केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य में क्या करें और क्या न करें 

क्या करे 
  • केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य अक्टूबर से मार्च के बीच घूमने आये 
  • पार्क में घुमनें के लिए पैदल के अलावा साइकिल या रिक्शा का उपयोग करें। 
  • अपनी दूरबीन और कैमरे साथ लेकर जाए। 
  • अगर आप पैदल घूम रहे है तो शांत रास्तों पर घूमे। 
  • पार्क में शांति बनाये रखे। 
  • पक्षियों के बारे में सटीक जानकारी  गाइड जरूर ले। 
  • केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य में घूमने  हलके रंग के कपड़े पहनें। 
  • मच्छरों से बचाव के लिए क्रीम लगा के जाए। 

क्या न करे 
  • केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य में निजी वाहन न ले जाए। 
  • पार्क में गंदगी न फैलाये। 
  • पक्षियों को छूने की कोश्शि न करें। 
  • घना पक्षी अभयारण्य में घूमने के दौरान फ़्लैश फोटोग्राफी नहीं करें। 
  • पक्षियों की तरफ किसी भी वस्तु को ना फेंके। 
  • पार्क में छोटे पेड़-पौधों और वनस्पतियों को नुकसान ना पहुँचावे। 
  • पार्क में धूम्रपान करना और नशा करके प्रवेश न ले। 

केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य कैसे पहुँचे 

केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य आप सड़क, ट्रेन और हवाई तीनों मार्ग से पहुँच सकते हैं। 
बस द्वारा - अगर आप केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य बस मार्ग द्वारा आ रहे हो तो आपको नजदीकी भरतपुर बस  पड़ेगा।  केवलादेव पक्षी अभयारण्य की दूरी मात्र 3 किमी हैं। यहाँ से आप रिक्शा या स्थानीय बस द्वारा केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य पहुँच सकते हैं। जयपुर से  केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य 190 किमी, अलवर से 105 किमी और दिल्ली से 198 किमी दूर स्थित हैं। आगरा से केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य मात्र 52 किमी दूर स्थित हैं। 
ट्रेन द्वारा - अगर आप ट्रेन मार्ग से केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य आना चाहते है तो आपको नजदीकी भरतपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन उतरना पड़ेगा। यहाँ से केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य मात्र 5 से 6 किमी दूर स्थित हैं। 
हवाई मार्ग - अगर आप केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य प्लेन से आना चाहते हो तो आपको जयपुर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरना पड़ेगा। यहाँ से आप बस या टैक्सी द्वारा केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य पहुँच सकते हो। 

केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य आस-पास 

लोहागढ़ फोर्ट - जाट वंश से महाराजा सूरजमल द्वारा बनवाया गया यह किला आज भरतपुर में एक मुख्य पर्यटन स्थल बना हुआ है। 18वी सदी में निर्मित इस किले में ही लाल किला दिल्ली द्वार रखे  हुए हैं। 
डीग फोर्ट - इस किले का निर्माण महाराजा सूरजमल ने 1730 ईस्वी में करवाया था। 1765 में दिल्ली के लाल किले पर आक्रमण के दौरान मुग़ल सिंहासन को डीग महल में जाट शासक ले आये थे। वर्तमान समय में भी यह सिंहासन डीग महल में रखा हुआ हुआ हैं।  

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!